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Sultanpur News: 18 साल चला मुकदमा, नहीं साबित हुआ आरोप

Fri, 07 Feb 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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सुल्तानपुर। दीवानी बमकांड के चर्चित मामले में करीब 18 साल तक कोर्ट में मुकदमा चला। 13 गवाहों ने गवाही दी लेकिन आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सका। दो आरोपियों की मौत हो चुकी है। बृहस्पतिवार को जिला जज लक्ष्मीकांत शुक्ल ने दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया है। कोर्ट के फैसले से आरोपियों को राहत मिल गई है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक दलित उत्पीड़न के मामले में जेल में निरुद्ध रहे धनपतगंज के पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू को आठ नवंबर 2006 को पुलिस पेशी पर कोर्ट लाई थी। वज्र वाहन से उतरने के बाद वे एससी-एसटी एक्ट की विशेष कोर्ट में विचाराधीन मुकदमे में हाजिर होने के लिए जा रहे थे। तभी उन पर बम से हमला कर दिया गया था। यशभद्र सिंह मोनू के समर्थकों ने बहराइच जिले के मल्हीपुर थाने के बरगदहा गांव निवासी मदन कुशवाहा व कूरेभार थाने के मझौवा महमंदीपुर निवासी राजेंद्र मिश्र को हमला करने के आरोप में पकड़ लिया था। आरोपी मदन कुशवाहा के पास बम बरामद होने का दावा किया गया।
पुलिस ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू की तहरीर पर आरोपी मदन कुशवाहा, राजेंद्र मिश्र और संत ज्ञानेश्वर के भाई इंद्रदेव तिवारी व मैनेजर रामसहाय सिंह के खिलाफ कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी इंद्रदेव तिवारी व रामसहाय सिंह की मौत हो गई।
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13 गवाहों ने दी गवाही
इस मामले में 13 गवाहों की कोर्ट में गवाही दर्ज कराई गई थी। इनमें वादी मुकदमा पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू, विवेचक आरएस यादव व अशोक कुमार तिवारी मुख्य रूप से शामिल हैं। दीवानी बमकांड के मामले में पुलिस ने तीन धाराओं में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसमें जानलेवा हमला, पांच विस्फोटक पदार्थ अधिनियम व सात क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धारा शामिल है।

एक्शन प्लान में चिन्हित किया गया मामला
दीवानी बमकांड का मामला कोर्ट ने एक्शन प्लान में चिन्हित किया था। इससे मामले में सुनवाई के लिए लंबी तिथि नहीं तय की जा रही थी। एक्शन प्लान में चिन्हित होने के बावजूद कोर्ट को फैसला करने में करीब 18 साल लग गए।
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