बेदूपारा गांव के पास गड्ढे में शनिवार दोपहर एक महिला और बच्चे का शव पाया गया। शवों की शिनाख्त परिवारीजनों ने मां और बेटे के रूप में की है। एक दिन पूर्व ही रेल ट्रैक पर मृतका की मासूम बच्ची का भी शव पाया गया था। पुलिस प्रथम दृष्टया खुदकुशी का मामला मान रही है।
लंभुआ कोतवाली क्षेत्र के ढेलहा गांव निवासी दलित अमरनाथ की पत्नी पुष्पा (28) बेटे अनुज (8) और गौरी (5) के साथ ससुर मिठाईलाल व ननद के घर में रहती थी, जबकि पति अमरनाथ भाई अमरजीत, अमृतलाल व रोहित के साथ दिल्ली में मजदूरी करता है। शुक्रवार दोपहर पुष्पा दोनों बच्चों के साथ दवा कराने के बात कह घर से निकली थी।
देर शाम तक तीनों जब घर नहीं पहुंचे तो परिवारीजनों ने खोजबीन शुरू की। देर शाम बेदूपारा गांव के पास सुल्तानपुर-जफराबाद रेलखंड पर एक मासूम बच्ची का क्षत-विक्षत शव पाया गया था। आशंका जताई जा रही थी कि मासूम की किसी ट्रेन से गिरकर मौत हुई है। पुलिस शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त में जुटी थी।
शनिवार दोपहर बेदूपारा गांव के बाहर बरसात के पानी से भरे गड्ढे में ग्रामीणों ने एक महिला और बच्चे का शव उतराता देखा। पुलिस ने दोनों शवों को बाहर निकाला। लोगों की भीड़ में किसी व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार दोपहर से ढेलहा गांव से एक महिला दो बच्चों के साथ लापता है।
पुलिस ने ढेलहा गांव प्रधान को मिठाईलाल के घर वालों को सूचित करने के लिए भेजा। मिठाईलाल ने शव की शिनाख्त पुष्पा और अनुज के रूप में की। थाने जाकर मिठाईलाल ने शुक्रवार को रेल ट्रैक पर मिली बच्ची के शव की पहचान गौरी के रूप में किया। प्रभारी कोतवाल हरिशंकर तिवारी ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या मामला खुदकुशी का प्रतीत हो रहा है।
खुदकुशी की आशंका
बेदूपारा गांव के बाहर पानी से भरे गड्ढे में मिला अनुज का गला पुष्पा के साड़ी के पल्लू से बंधा था। ग्रामीणों की मानें तो संभवत: पुष्पा ने बेटी को रेल ट्रैक पर ट्रेन के सामने फेंकने के बाद बेटे के गले में फंदा डालकर पानी में कूद गई जिससे दोनों की मौत हो गई।