सुल्तानपुर। इन दिनों गोवंशों में लंपी वायरस तेजी से फैल रहा है। पशुओं में फैलने वाली इस बीमारी से पशुपालक परेशान हैं। कुड़वार दूबेपुर, करौंदीकला, भदैंया, बल्दीराय ब्लॉक क्षेत्रों में बीमारी का ज्यादा प्रकोप है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में एहतियात के तौर पर 17,000 गोवंशों का टीकाकरण कराया जा चुका है। हालांकि, किसी मवेशी की मौत नहीं हुई है। सरकारी डॉक्टर नहीं मिलने से पशुपालक निजी डॉक्टरों से अपने पशुओं का महंगा इलाज करवा रहे हैं।
पशुपालन विभाग के मुताबिक, जिले में 2,19,020 गोवंशीय और 2,35,035 महिषवंशीय मवेशी हैं। इसके अलावा जिले भर में संचालित 49 गो-आश्रय स्थलों में कुल 11,963 गोवंश हैं। कुड़वार के नेवरा, पूरे दयाराम, भंडरा, अलीगंज क्षेत्र के रवनिया, चकौदी, बबुरी, ऊंचगांव, टिकरिया, मठारामपुर आदि गांवों में लंपी बीमारी से मवेशी बीमार हैं। भंडरा निवासी सच्चिदानंद दुबे ने बताया कि दो गाय बीमार होने पर पशु चिकित्सक से संपर्क कर टीकाकरण करवाया। एक सप्ताह पहले दूबेपुर के तिवारीपुर फतेहपुर गांव निवासी रवि तिवारी और रामेश्वर तिवारी की गाय लंपी बीमारी की चपेट में आ गई थी। सरकारी पशु डॉक्टर के नहीं मिलने पर प्राइवेट डॉक्टर से दो दिन तक इलाज कराया। अब गाय की हालत ठीक है।
गोवंश में लंपी रोग के लक्षण
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रमोद शर्मा ने बताया कि लंपी एक विषाणु जनित चर्म रोग है। यह सिर्फ गोवंशों में फैलता है। इसमें पशु को तेज बुखार, आंख-नाक से पानी गिरता है। पैरों में सूजन, कठोर व चपटी गांठ से शरीर का ढंक जाती है। सांस लेने में भी दिक्कत होती है। इस तरह का लक्षण दिखाई देने पर अपने नजदीक के पशु चिकित्साधिकारी को तत्काल सूचित करें।
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लंपी संक्रमण से बचाव के तरीके
दूबेपुर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि खासकर यह वायरस गाय प्रजाति के पशुओं में फैल रहा है। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि अपने संक्रमित पशुओं को अन्य पालतू जानवरों से दूर रखें। मवेशियों के आसपास की जगहों को साफ-सुथरा रखें। पालतू जानवर जहां रहते हैं, वहां मच्छरों और मक्खियों को पनपने से रोकें।
20,000 लंपी का टीका मिला
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि 20,000 लंपी का टीका मिला है। करीब 10 दिन के अंदर 17,000 गोवंशों का टीकाकरण किया गया है। इसके अलावा यदि किसी पशुपालक के यहां गोवंश में लंपी की शिकायत मिलती है तो उसका इलाज करने के लिए टीम भेजी जाती है।