सुल्तानपुर। त्योहारों पर आप मिठाई खरीदने जा रहे हैं तो सावधानी बरतें। रंग-बिरंगी मिठाइयां सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं। मिठाई काे देखकर, सूंघकर और चखकर ही खरीदें। यही ऐसा तरीका है, जिससे खराब हो चुकी मिठाइयों को खरीदने से बचा जा सकता है।
फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने सितंबर 2020 में खुली मिठाई के डिब्बों पर निर्माण की तिथि और बेस्ट बिफोर डेट लिखना अनिवार्य कर दिया था, लेकिन मिठाई कारोबारियों के विरोध के बाद सात नवंबर 2023 में आदेश वापस ले लिया गया। दिवाली व अन्य त्योहारों पर खुली मिठाई खरीदते वक्त लोगों को खुद इसकी जांच करनी होगी।
खरीदने से पहले पूछें, कितनी देर पहले बनी मिठाई
सहायक आयुक्त अयोध्या मंडल विनोद कुमार सिंह ने बताया कि रस मलाई, दूध की बर्फी, छेने का रसगुल्ला, छेने से बनी मिठाई और ढोकला दुकान के फ्रीजर से बाहर आने के चार से पांच घंटे में खराब होने लगता है। दूध से बनी गीली मिठाइयां और ढोकला ज्यादा समय तक स्टोर नहीं रखना चाहिए। खरीदते वक्त जरूर पूछे कि कितनी देर पहले की बनी है और इनका इस्तेमाल उसी दिन कर लें। सहायक आयुक्त खाद्य अजीत कुमार की मानें तो बेसन से बनी या पैकेज्ड व मावा से बनी मिठाइयों के मुकाबले दो या तीन दिन तक खराब होने से बच सकती हैं।
मिठाई को नमी से बचाना जरूरी
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी निर्भय नरायन सिन्हा ने बताया कि लोग अक्सर मिठाई खराब होने से बचाने के लिए फ्रिज में रखते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। मिठाई में जितनी जल्दी नमी आएगी, वह उतनी तेजी से खराब होगी। नमी के जरिए मिठाई में पानी का अंश पहुंच जाता है। दुकानदार से पूछकर ताजी मिठाई खरीदें और ज्यादा दिन तक स्टोर न करें।
मिठाई खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान..
-मिठाई का रंग ज्यादा गहरा न हो।
-अगर मिठाई बासी है, तो उस पर सूखापन दिखेगा।
-अगर मिठाई से वर्क छुड़ाने पर निकल जाए, तो वह नकली है।
-चांदी का वर्क हाथ से घुल जाए, तो वह नकली है।
-मिठाई की खुशबू से उसकी गुणवत्ता का पता चलता है।
-अगर रंगीन मिठाई को छूने पर रंग छूटे, तो वह नकली है।
-दूध से बनी मिठाई में अगर अजीब तरह की गंध आ रही है, तो उसमें सिंथेटिक दूध मिलाया गया है।