उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अमर उजाला की टीम सुल्तानपुर पहुंची। टीम ने यहां रोजगार, महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के प्रयासों को परखा गया। पर्यटन क्षेत्रों के विकास और अन्य बदलावों को भी देखा गया। लोगों से बातचीत कर जिले की वास्तविक स्थिति समझी गई। इस दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि सरकारी योजनाओं का आम लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ा है और जिले में विकास की वास्तविक स्थिति क्या है?
महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए हम उतुरी गांव पहुंचे। यहां हमने ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहे स्वयं सहायता समूह के कार्यों को देखा। प्रोडक्शन इंचार्ज शिव कुमारी ने बताया यह मसाले की फैक्टरी है, जिसमें वह दाल, बेसन और चने की दाल आदि बनाते हैं। हम लोग मार्केट में बेचते भी हैं। उन्होंने बताया कि वह समूह से जुड़ी हैं तो संस्था से हम लोन ले लेते हैं। अभी चार लाख का लोन लिया है। हम लोग मास्क और टोपियां लगाकर काम करते हैं। हर चीज का ख्याल रखते हैं।
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पर्यटन के क्षेत्र में कितना आया बदलाव?
इस सवाल का जवाब ढूंढते हुए लंभुआ के कमल सरोवर पहुंचे। यहां एपीओ मनरेगा, नवीन मिश्रा ने बताया ये शुरुआत में ये तालाब की जमीन थी। हमारे उच्च अधिकारियों द्वारा इस पर एक प्रोजेक्ट बनाया गया, यह सोच के कि यहां पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, आसपास के लोगों के टहलने के लिए, बच्चों के खेलने के लिए एक पार्क डेवलप किया जाए। मनरेगा योजना अंतर्गत क्षेत्र पंचायत की निधि और विधायक निधि के द्वारा इसको डेवलप किया गया। यहां पर गार्डन वगैरह जो है हमने मनरेगा योजना अंतर डेवलप किया।
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विकास से कितनी बदली सूरत?
इसे समझने के लिए टीम धोपाप धाम पहुंची। यहां स्थानीय निवासी संजय सिंह ने बताया कि सरकार की तरफ से विकास को लेकर काफी प्रयास किए गए हैं। जैसे इस धाम की ये बाउंड्री बनवाई गई, पेंटिंग के कार्य कराए गए, मंदिर की देखरेख की व्यवस्था कराई गई। इसी सरकार में इंटरलॉकिंग की व्यवस्था हुई। अभी वर्तमान में भी लगभग दो करोड़ रुपये इसके डेवलपमेंट के लिए सरकार ने वित्तीय स्वीकृति दी है। धोपाधाम की मान्यता को लेकर बताया कि इसका विशेष धार्मिक मान्यता है। हमारे बुजुर्ग लोग भी इसके बारे में बताते हैं।
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