केंद्र सरकार की ओर से कराए गए स्वच्छता के सर्वे में गंदगी के मामले में सुल्तानपुर को 309 वीं रैंक हासिल हुई है। यह नतीजे 434 शहर के सर्वे के हैं। जाहिर तौर पर यह स्थिति निराश करने वाली है। इसके लिए जनजागरूकता की कमी के साथ ही नगर पालिका प्रशासन जिम्मेदार है। हालत यह है कि शहर में कूड़ा निस्तारण संयंत्र तक नहीं हैं। एसवीएम प्लांट (सीवरेज वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट) न होने से कूड़ा निस्तारण का प्रबंधन सफल नहीं हो सका है।
केंद्र सरकार की ओर से 434 शहरों में कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के नतीजे आ गए हैं। सर्वे में गंदगी के मामले में सुल्तानपुर को 309 वीं रैंक हासिल हुई है। शहर में स्वच्छता अभियान के सफल संचालन को लेकर तमाम तरह के अवरोध हैं। इनसे निपटना पालिका के अधिकारियों के लिए चुनौती बना है। शहर के 25 वार्ड में नियमित सफाई के लिए करीब 360 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
इनमें 122 नियमित कर्मचारी हैं। ठेके पर 38 कर्मचारियों को लगाया गया है। 200 दिहाड़ी सफाई कर्मी भी शामिल हैं। नगर पालिका के अधिकारियों के मुताबिक सफाई कर्मचारियों के वेतन व अन्य मद में करीब 40 लाख रुपये का खर्च आता है। इनसे वार्डों की सफाई का कार्य लिया जा रहा है। नगर पालिका के पास गली व मोहल्लों से कूड़े का निस्तारण टेंपो, लोडर, मिनी ट्रक से किया जाता है। पालिका के अधिकारियों की मानें तो सर्वे में जनपद को कम अंक मिलने के पीछे सबसे बड़ी कमी जन जागरूकता की है।