जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल में गन्ना किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो पा रही है। चीनी मिल के गन्ना यार्ड में सुविधाएं नदारद हैं। यार्ड में किसानों के लिए पानी, प्रकाश, अलाव के साथ ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। गलत तरीके से ज्यादा संख्या में गन्ना पर्ची भेज देने से यार्ड में गन्ना लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। किसानों को अपने गन्ने की तौल कराने में छह से सात दिन लग जाते हैं।
किसान कड़ाके की ठंड भरी रात गन्ना यार्ड में गुजार रहे हैं। किसान सहकारी चीनी मिल में तीन दिसंबर 2016 को गन्ना पेराई शुरू हुई थी। मिल की एक दिन की गन्ना पेराई करने की क्षमता 12.50 क्विंटल है। जर्जर कल-पुर्जे के सहारे चल रही चीनी मिल में आए दिन तकनीकी खराबी समेत अन्य कारणों से गन्ना की पेराई ठप हो जाती है। गाढ़ी कमाई से तैयार गन्ना की फसल से फायदा लेना किसानों के लिए आसान नहीं रह गया है। किसान ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर लदवाकर अपना गन्ना मिल में ला रहे हैं। एक साथ काफी संख्या में गन्ना की पर्ची जारी कर देने से यार्ड में गन्ना लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग गई है। इससे किसानों को अपने गन्ने की तौल कराने के लिए छह से सात दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ठंड में किसान यार्ड में रात गुजारने को मजबूर हैं।
मिल प्रबंधन की लापरवाही से किसानों की परेशानी कम नहीं हो रही है। यार्ड में पानी, प्रकाश, अलाव के साथ सुरक्षा की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। रात में किसानों के ट्रैक्टर से सामानों की चोरी हो रही है। इनसेट छह लाख 40 हजार पांच सौ क्विंटल गन्ना की हुई पेराई कूरेभार। किसान सहकारी चीनी मिल के लिए इस बार 15 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पेराई के दौरान तकनीकी खराबी समेत अन्य वजहों से कई बार मिल में गन्ना की पेराई ठप हो चुकी है। अभी तक मिल में छह लाख 40 हजार पांच सौ क्विंटल गन्ना की पेराई हुई है। ऐसी स्थिति में चीनी मिल के लिए निर्धारित पेराई लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा।