सुल्तानपुर। सरकार के तमाम दिशा-निर्देशों के बाद भी अभी तक चीनी मिल ने हजारों गन्ना किसानों का भुगतान नहीं किया है। चीनी मिल पर किसानों का पांच करोड़, 15 लाख, 42 रुपये बकाया चल रहा है।
चीनी मिल के पेराई सत्र का समापन हुए चार माह से ज्यादा समय बीत गया है। जिले की इकलौती किसान चीनी मिल गन्ना किसानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है।
चीनी मिल 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य का भुगतान कर पाने में फेल है। बकाया भुगतान पाने के लिए गन्ना किसान चीनी मिल का चक्कर काट रहे हैं।
उद्योग के नाम पर जिले की एकमात्र पहचान बनी किसान सहकारी चीनी मिल संकट से नहीं उबर पा रही है। 17 दिसंबर 2018 को चीनी मिल में गन्ना पेराई शुरू हुई थी।
पांच माह तक गन्ना की पेराई करने के बाद 19 मई 2019 को पेराई सत्र का समापन हुआ था। पेराई सत्र के दौरान चीनी मिल ने किसानों के 11 लाख, 58 हजार, 166 क्विंटल, 12 किलोग्राम गन्ने की पेराई की थी।
किसानों के खरीदे गन्ने का मूल्य 36 करोड़, 24 लाख, एक हजार रुपये हुआ था। चीनी मिल ने 31 करोड़, 24 लाख, 59 हजार रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया है।
अभी भी पांच करोड़ 15 लाख, 42 हजार रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिल ने नहीं किया है। गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से किसानों की परेशानी उठानी पड़ रही है।
जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक अखिलेश पांडेय ने बताया कि 11 अप्रैल 2019 तक खरीदे गए गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिल ने किया है।
सरकार ने गन्ना किसानों का मूल्य भुगतान करने के लिए 14 दिन का समय निर्धारित किया है। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर चीनी मिल को बकाया पर ब्याज देने का प्रावधान है। ब्याज देने को कौन कहे चीनी मिल किसानों को उनका बकाया मूल्य ही नहीं दे पा रही है।