इन छात्राओं को मिली सफलता
गोमती के कछार में बसे गांव भोएं, मोलनापुर, टेढ़ुई, रतनपुर, कस्बा व पांचोंपीरन की अन्नू, राजनंदनी, शिखा, रोमा, अनीता, मीता, नीलू, किस्मती, कुसुम, राधिका, निशा, रीमा जैसी छात्राएं जूनियर इंजीनियर बनने की राह पर हैं। इन सभी ने 2024 में पॉलिटेक्निक में प्रवेश लिया है। कोशिश की पाठशाला से निकली अंशिका जेएनयू में बीए आनर्स (जापानी भाषा) की डिग्री ले रही हैं।
वहीं 2023 में अच्छी रैंक के साथ प्रिया यादव, खुशी विश्वकर्मा, मुस्कान गुप्ता, राधा निषाद, शक्ति अग्रहरि, काजल निषाद का प्रवेश राजकीय पॉलिटेक्निक लखनऊ में हो चुका है। इसी साल महक, आंचल और जांनिसार का प्रवेश जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ है। कोशिश की छात्रा गौरी कर्माकर सहित कई छात्र बाहर तैयारी कर रहे हैं।
कोशिश को संचालित करने वाले केएनआईटी के छात्रों को संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव उपाध्याय भी प्रोत्साहित करते हैं। संस्था की ओर से सिर्फ छात्राओं का ही नहीं, बल्कि छात्रों का सुनहरा भविष्य भी गढ़ा जा रहा है।
2011 से हुई शुरुआत
कोशिश पाठशाला की शुरुआत 2011 में केएनआईटी के छात्र दिल्ली निवासी चेतनगिरी गोस्वामी व उनके साथियों ने की थी। पासआउट होने के बाद भी चेतन व उनके कुछ साथी कोशिश से जुड़े हैं। गूगल मीट के जरिए छात्रों को नई गतिविधियों से अवगत कराते हैं। उत्तीर्ण होने के बाद सीनियर ये जिम्मेदारी अपने जूनियर को देते हैं। दायित्व स्थानांतरण का यह सिलसिला अनवरत जारी है। कोशिश संस्था का संचालन इसी साल राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बिजनौर और वाराणसी में भी शुरू हो गया है।
संजीवनी है इस तरह की पाठशाला: प्रो. रंजना
कोशिश संस्था से शुरुआत के दिनों से जुड़ी केएनआईटी में राजनीति शास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो. रंजना सिंह कहती हैं कि समाज की उन्नति में इंजीनियरिंग के छात्र बड़ा योगदान दे रहे हैं। पिछड़ी बस्तियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ मुख्य धारा में ला रहे हें। अभी 20 गांवों के 300 से ज्यादा बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।