सुल्तानपुर। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा का आयोजन 22 जुलाई से जिले के 85 केंद्रों पर होगा। बकरीद त्योहार की वजह से 21 जुलाई को होने वाली परीक्षा स्थगित कर 14 अगस्त को कर दी गई है। वहीं बीएड प्रवेश परीक्षा 30 जुलाई को होने के कारण इस तिथि की परीक्षा 16 अगस्त को होगी।
कोरोना संक्रमण की वजह से विश्वविद्यालय की परीक्षाएं इस बार सिर्फ डेढ़ घंटे की ही होगी। परीक्षा का पैर्टन पूर्व परीक्षा की भांति ही परंपरागत ही होगा। परीक्षा नियंत्रक उमानाथ सिंह ने बताया कि मुख्य परीक्षा के आयोजन के संबंध में केंद्राध्यक्षों व प्राचार्यों के साथ बैठक कर कुलपति ने दिशा-निर्देश दिए हैं।
कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए सभी कक्षों में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा होगी। इसकी मॉनिटरिंग विश्वविद्यालय के कंट्रोल रूम एवं सचल दल की ओर से की जाएगी।
सभी केंद्राध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के पूर्व पूरे परिसर को सैनिटाइज कराया जाय। साथ ही परीक्षा कक्ष में एक छात्र से दूसरे छात्र की दूरी का पालन किया जाय। कक्ष निरीक्षकों व परीक्षार्थियों को मास्क लगाना अनिवार्य किया गया है। केएनआईपीएसएस के प्राचार्य डॉ. राधेश्याम सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालयीय वार्षिक परीक्षा के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। बैठक व्यवस्था कोविड गाइडलाइन के अनुसार ही होगी।
परीक्षार्थी को आधे प्रश्न का देना होगा उत्तर
कोविड संक्रमण के बीच आयोजित होने वाली वार्षिक परीक्षा में परीक्षार्थियों को काफी सहूलियतें दी गई हैं। दो पालियों में आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए डेढ़-डेढ़ घंटे का समय दिया गया है। परीक्षा नियंत्रक उमानाथ सिंह ने बताया कि प्रत्येक खंड से परीक्षार्थी को आधे प्रश्न का उत्तर देना होगा।
इसमें खंड अ से दस प्रश्न की जगह पांच प्रश्न, खंड ब से पांच प्रश्न की जगह दो प्रश्न तथा खंड स से दो प्रश्न की जगह एक प्रश्न का उत्तर देना होगा। विश्वविद्यालय की परीक्षा 22 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त तक चलेगी।
बालिकाओं को स्वकेंद्र की सुविधा
सहायता प्राप्त महाविद्यालयों को छोड़कर सभी महाविद्यालयों के छात्रों की परीक्षा दूसरे कॉलेजों में होगी। बालिकाओं के लिए स्वकेंद्र की व्यवस्था दी गई है। धारण क्षमता के मुताबिक महाविद्यालयों में छात्र संख्या आवंटित की गई है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय की सचल दल का अधिक फोकस रहेगा।