श्रीनारायण मिश्र
सुल्तानपुर। आंखों में सिनेमाई दुनिया के रंगीन सपने संजोए सुल्तानपुर की खूबसूरत युवती मुंबई पहुंच गई। एक्टिंग की दुनिया में आते ही उसका नाम विजयलक्ष्मी सिंह से बदलकर मल्लिका राजपूत हो गया। उनकी प्रतिभा ही थी कि तिग्मांशु धूलिया की फिल्म रिवॉल्वर रानी फिल्म में काम करने का मौका भी मिला, किंतु फिल्म चली नहीं। फिर भी उन्होंने हाथ पांव मारे। छोटे-मोटे रोल किए और गायक शान के एल्बम यारा तुझसे... से मशहूर हुईं।
यहां से मल्लिका का स्टारडम भरा जीवन शुरू हुआ, किंतु इसके आगे उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो उन्होंने सियासत का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होकर वे राज्यसभा सदस्य ओम माथुर के लिए काम करने लगीं, लेकिन कुछ ही दिन में यहां से भी उनका मोहभंग हो गया। मुंबई से दिल्ली और विभिन्न शोज में काम करने के बाद उन्हें वह कामयाबी नहीं मिल पाई, जिसका उन्हें इंतजार था। हारकर वह सुल्तानपुर लौट आईं। यहां उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी हिस्सा लिया और कविताएं आदि लिखने लगीं। मल्लिका के फेसबुक प्रोफाइल को चेक करें तो वहां अनेक गीत और कविताएं मिल जाएंगी।
बाद में उनका रुझान धर्म की तरफ होने लगा। अयोध्या में मंदिर बनाए जाने को लेकर भी उन्होंने कई गीत और कविताएं लिखीं। जो उनके फेसबुक एकाउंट पर सुरक्षित हैं। अंतत: उन्होंने अवधूत उग्रचंडेश्वर कपाली बाबा से गृहस्थ संन्यास की दीक्षा लेकर खुद को मां मैत्तरायणी योगिनी बना डाला। इसके बावजूद वे सांसारिक मोह से मुक्त नहीं हो पाईं, जिसके चलते परिवार में विवाद रहने लगा। चकाचौंध का जीवन जीने वाली मल्लिका के सामने आर्थिक परेशानियां भी थीं। यदि उन्होंने आत्महत्या की है तो उसके पीछे भी यही वजह मानी जा रही है। बहरहाल विजयलक्ष्मी से शुरू हुआ उनका जीवन मल्लिका के स्टारडम, सियासत, मां मैत्तरायणी योगिनी के संन्यास से अतृप्त रहा। (संवाद)