सुल्तानपुर। जिन मैदानों से कभी जिले के खिलाड़ी निकलते थे, आज उन्हीं मैदानों पर कब्जे, सरकारी निर्माण और भूमि विवाद हावी हैं। शहर के अधिकांश पुराने विद्यालयों के खेल मैदान लगातार सिकुड़ते चले गए। कहीं सरकारी भवन बन गए, कहीं बाइक स्टैंड खड़ा हो गया। नजूल भूमि पर बने इन मैदानों का स्थायी स्वामित्व स्पष्ट न होने, समय पर सीमांकन न होने और प्रशासनिक उदासीनता ने खिलाड़ियों के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) के पास कभी 50 बिस्वा खेल मैदान था। वर्ष 2015-16 में डीआईओएस कार्यालय और राजकीय पुस्तकालय के लिए 10 बिस्वा भूमि आरक्षित कर दी गई। अब करीब 40 बिस्वा मैदान बचा है। इसी परिसर में इंडोर स्टेडियम का निर्माण होने से आउटडोर खेलों के लिए पर्याप्त जगह लगभग खत्म हो चुकी है।
जमीन के विवाद में खत्म होते गए मैदान
महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज (एमजीएस) का खेल मैदान भी अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया। विद्यालय प्रशासन के मुताबिक कभी 450 बिस्वा में फैला मैदान अब लगभग 350 बिस्वा रह गया है। करीब 100 बिस्वा भूमि पर कब्जे का मामला उच्च न्यायालय समेत अन्य अदालतों में लंबित है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का खेल मैदान भी इतिहास बन चुका है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार पीछे की करीब 50 बिस्वा भूमि पर पहले खेल गतिविधियां होती थीं, लेकिन सीमांकन विवाद के बाद नगर पालिका ने वहां बाइक स्टैंड विकसित करा दिया। अब छात्राओं के लिए आउटडोर खेल लगभग समाप्त हो गए हैं।
नजूल जमीन का सीमांकन टेढ़ी खीर
रिटायर्ड कानूनगो एसबी गुप्ता का कहना है कि नजूल जमीन का सीमांकन टेढ़ी खीर होती है क्योंकि राजस्व अभिलेख में इसका स्थायी स्वामित्व नहीं होता है। पुराने राजस्व अभिलेख, स्पष्ट सीमांकन का अभाव और लगातार निगरानी न होने से शहर में अतिक्रमण बढ़ता गया। विद्यालयों और प्रशासन ने समय रहते जमीन की सुरक्षा नहीं की, जिसका खामियाजा आज खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। जीआईसी, जीजीआईसी, एमजीएस, एमएसवी और रामकली इंटर कॉलेज समेत कई संस्थानों की भूमि आज भी विवादों में फंसी हुई है।
कहां कितना सिकुड़ा मैदान
जीआईसी: 50 बिस्वा से घटकर करीब 40 बिस्वा, शेष हिस्से में सरकारी निर्माण।
एमजीएस इंटर कॉलेज: 450 बिस्वा से घटकर लगभग 350 बिस्वा, 100 बिस्वा पर कब्जे का विवाद
जीजीआईसी: खेल मैदान की भूमि सीमांकन विवाद में गई, अब बाइक स्टैंड बना
अन्य संस्थान: एमएसवी, रामकली इंटर कॉलेज समेत कई विद्यालयों की भूमि भी विवादों में
इसलिए बढ़े कब्जे
अधिकांश मैदान नजूल भूमि पर बने।
स्थायी स्वामित्व और बैनामा नहीं हुआ।
वर्षों तक सीमांकन नहीं कराया गया।
विद्यालय प्रशासन ने नियमित निगरानी नहीं की।
प्रशासन ने अतिक्रमण रोकने के बजाय कई जगह दूसरे निर्माण करा दिए।
विवाद बढ़ने पर मामले अदालतों तक पहुंच गए।
सबसे बड़ा नुकसान बच्चों का
खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए पर्याप्त मैदान नहीं मिल रहे।
फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स जैसे आउटडोर खेल प्रभावित।
स्कूलों में खेल प्रतियोगिताएं सिमटती जा रही हैं।
नई खेल प्रतिभाओं के उभरने की संभावनाएं लगातार कम हो रही हैं।
खेल मैदान पर पार्किंग