अमेठी। रूस की प्राकृतिक एवं जैविक तकनीक से अमेठी की ऊसर भूमि उपजाऊ बनेगी। भूमि की उर्वरता बढ़ने से फसल की उपज दोगुनी होगी। रूस से आई वैज्ञानिक टीम ने खेत में पहुंचकर इसका प्रयोग किया।
भाजपा नेता रश्मि सिंह के प्रयास से बृहस्पतिवार को कृषि वैज्ञानिक अलेक्जेंडर यूक, स्मार्ट ग्रीन लाइन के सीईओ यूरी, एक्सपर्ट ओलगा अमेठी पहुंचे। रूसी वैज्ञानिकों ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए भूमि का उपजाऊ होना जरूरी है।
उसरीली और क्षारीय भूमि को प्राकृतिक और जैविक खाद का प्रयोग कर उपजाऊ बनाया जा सकता है। वर्ष में एक बार इसका प्रयोग कर भूमि को उपजाऊ बनाकर अच्छी उपज पाई जा सकती है।
लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से उपजाऊ भूमि की उर्वरता कम होती जा रही है। यह तकनीक क्षारीय भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिए 8.5 से 9.5 पीएच तक उपचार और सुधार करती है।
इसमें प्रति हेक्टेयर प्राकृतिक सल्फर 30 किलोग्राम, फास्को जिप्सम 1.5 मीट्रिक टन, ग्लूकोनाइट (हरी रेत) एक मीट्रिक टन, चिकन लिटर दो मीट्रिक टन का प्रयोग किया जाता है। मात्रा आवश्यकता के अनुरूप 50 प्रतिशत से सौ प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार खेत में 10 से 15 दिनों के उपचार के बाद उसरीली भूमि कृषि योग्य हो जाएगी। उपचार के दौरान खेतों में आवश्यकता के अनुसार पानी होना चाहिए। इसके लगातार प्रयोग से भूमि में समाप्त हुए जीवाश्म फिर जीवित हो जाते हैं।
रश्मि सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की ओर से भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य हो रहा है। बृहस्पतिवार को महमदपुर भेमौरा गांव में वैज्ञानिकों ने एक खेत में कार्य किया। इस मौके पर गौरव सूद, रिटायर्ड आईएएस केएम लाल, बीके सिंह, पवन सिंह, बच्चा शुक्ल मौजूद रहे।