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महाशिवरात्रि को लेकर सजने लगे शिवालय

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जुटती है भक्तों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए शहर व ग्रामीण क्षेत्र के शिवालय सजने लगे हैं। जिले में महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। शिव मंदिर व शिवालयों पर लोग आस्था के साथ जल चढ़ाते हैं। शहर के सीताकुंड स्थित पारिजात वृक्ष पर पिछले करीब दशक भर से शिवरात्रि के दिन भक्तों की भीड़ उमड़ती हैं। शुक्रवार को पडने वाले महाशिवरात्रि पर्व को लेकर शिवालय सजने लगे हैं। 24 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व है।
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लंभुआ कस्बे से चार किलोमीटर दूर जनवारीनाथ धाम पर महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती हैं। मंदिर के पुरोहित की ओर से शिवालय में साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। यहां तक पहुंचने के लिए कस्बे से होकर गई सडक़ की हालत काफी खराब है। बीते कई साल से खस्ताहाल सडक़ मरम्मत नहीं कराई गई है। जनवारीनाथ धाम जिले का प्रसिद्ध स्थल है। इसके बाद भी सडक़ की दशा सुधारने के लिए किसी ने कोई ठोस पहल नहीं की। शहर के सीताकुंड स्थित पारिजात वृक्ष के प्रति भी लोगों की गहरी आस्था है। यहां महाशिवरात्रि के दिन पूरा शहर उमड़ता है।

भोर से शुरू होकर देर रात तक यहां जलाभिषेक व पूजा पाठ का कार्य चलता है। इसके अलावा शहर व कस्बाई इलाकों में स्थित शिव मंदिरों पर जलाभिषेक व पूजा-पाठ होता है। शिवरात्रि पर्व को लेकर शिवालयों में साफ-सफाई का कार्य चल रहा है। बॉक्स जलाभिषेक को उमड़ेगी भक्तों की भीड़ सुल्तानपुर। दूबेपुर विकास क्षेत्र के फतेहपुर गांव में स्थित शिव मंदिर पर महाशिवरात्रि के दिन शुक्रवार को जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। करीब दो सौ साल पुराने शिव मंदिर का जीर्णोद्धार होने के बाद लोगों की आस्था बढ़ गई है। मंदिर के पुजारी पं. राम किशोर त्रिपाठी रोजाना सुबह पूजा-पाठ और शाम को आरती कराते हैं।
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आरती के समय गांव के लोगों की भीड़ जुटती है। शिवरात्रि की तैयारी को लेकर अरुण कुमार तिवारी, राकेश तिवारी, रामेश्वर, विपिन, शिवम, गजेंद्र, सोनू आदि लोग जुटे हैं। बॉक्स स्वत: स्फूर्त हुआ था शिवलिंग लंभुआ तहसील क्षेत्र के सैतापुर सराय गांव के जंगल के बीच स्थित शिवलिंग की स्थापना का आज तक कोई सही प्रमाण नहीं मिल सका है। मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां शिवलिंग स्वत: स्फूर्त हुआ था। स्वप्न आने के बाद गांव के एक बुजुर्ग काली सिंह घर-परिवार छोडक़र शिवलिंग के पास आकर कुटी बनाकर रहने लगे। कुटी में लगे लाखौरी ईंटों के प्रमाण आज भी मौजूद हैं। धीरे-धीरे यहां का विकास होता गया और आज लोगों की आस्था का केंद्र बना है।
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