सुल्तानपुर। नदी के तराई क्षेत्र के सात गांव बाढ़ के मुहाने पर है। गोमती नदी का हल्का जलस्तर बढ़ते ही सातों गांवों की फसलें डूब जाती हैं। अपनी फसलों के लिए किसान आशंकित हैं। जिला प्रशासन ने पूर्व की स्थितियों को देखते हुए बाढ़ से निपटने की कार्ययोजना तैयार कर ली है। हालांकि, अभी गोमती नदी का जलस्तर यथावत है और बाढ़ के निशान से काफी नीचे है।
बरसात शुरू होने के पहले ही जिला प्रशासन ने बाढ़ से बचाव की कार्ययोजना तैयार कर ली है। सदर तहसील क्षेत्र के तराई क्षेत्रों के सातों गांव नौगवांतीर, माधवपुर तीर, औदहा, सोती, मुड़वा, सड़ांव व भंडरा पुरुषोत्तमपुर का जिक्र किया गया है। गोमती नदी का जलस्तर 82.40 मीटर होते ही पानी इन गांवों की फसलों को अपनी चपेट में ले लेता है। शहर के गोलाघाट पर गोमती नदी का जलस्तर 84.40 मीटर तक सामान्य माना गया है, लेकिन इतने ही जलस्तर पर इन सातों गांवों की आबादी तक पानी पहुंच जाता है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों के लिए नावों, दवाओं व पशुओं के चारे की व्यवस्था करते हुए तीन शरण स्थली बनाया है। ऊंचाई पर स्थित विद्यालयों को भी चिह्नित किया गया है। कर्मचारियों व अधिकारियों की ड्यूटी लगाते हुए उन्हें पहले से सतर्क किया गया है।
इनसेट.. उपजिलाधिकारियों को बनाया गया प्रभारी
प्रत्येक उपजिलाधिकारियों को तहसील का प्रभारी बनाते हुए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को नोडल नामित किया गया है। प्रभावित लोगों के लिए भोजन, बिस्तर समेत अन्य का इंतजाम किया गया है।
तैयारियां पूरी
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व व दैवी आपदा राहत प्रभारी एस सुधाकरन ने बताया कि अभी गोमती नदी का जलस्तर काफी नीचे है। शासन के निर्देश पर बाढ़ से निपटने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वर्ष 1988 के बाद कोई बाढ़ जिले में नहीं आई है।