सुल्तानपुर। विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी का वाहन सीज करने, अभद्रता, मारपीट और तोड़फोड़ के आरोपों से जुड़े मामले में एसीजेएम कोर्ट से तत्कालीन थाना प्रभारी सहित सात पुलिसकर्मियों को सुनवाई के लिए तलब किया गया। इस आदेश को दो आरोपियों ने जिला जज की अदालत में चुनौती दी है। इंस्पेक्टर अमरनाथ विश्वकर्मा और उप निरीक्षक तेज बहादुर की ओर से निगरानी याचिका दाखिल की गई है।
जिला जज सुनील कुमार की अदालत ने विलंब अर्जी के साथ दाखिल याचिका को प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज करते हुए विपक्षी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 23 अक्तूबर की तारीख तय की गई है।
कोतवाली देहात के रामपुर हनुमानगंज निवासी हृदयराम यादव ने 26 फरवरी 2017 की घटना पर तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। परिवाद के मुताबिक वह जनपार्टी के टिकट पर लंभुआ विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी थे। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी आजाद सिंह केसरी और पुलिसकर्मियों बृज बहादुर भारती, अखिलेश कुमार, शिवकुमार यादव, दुर्गेश कुमार, अमरनाथ विश्वकर्मा और तेज बहादुर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार कर वाहन सीज कर दिया।
परिवादी का आरोप है कि उच्चाधिकारियों और निर्वाचन आयोग से शिकायत करने पर नाराज पुलिसकर्मी एक मार्च 2017 को उनके निजी महाविद्यालय में पहुंचे और मारपीट व तोड़फोड़ की। इस पर उन्होंने एसीजेएम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। तत्कालीन एसीजेएम प्रथम शुभम वर्मा ने 12 सितंबर 2025 को सातों आरोपियों के खिलाफ विचारण के लिए पर्याप्त आधार मानते हुए उन्हें तलब करने का आदेश दिया था। करीब एक साल बाद सहजनवां के भीटी रावत निवासी इंस्पेक्टर अमरनाथ विश्वकर्मा और सराय लखंसी, मऊ निवासी एसआई तेज बहादुर ने इसी आदेश के खिलाफ जिला जज कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की है।