एप पर अलाव की फोटो डाउन लोड करते राजस्व कर्मी।
सुल्तानपुर। दैवी आपदा एवं राहत विभाग के कार्यों पर प्रहरी एप की नजर है। विभाग की इस नई व्यवस्था से राजस्व कर्मियों के पसीने छूट गए हैं। ठंड में पीड़ितों के अलाव का इंतजाम करने और एप पर फोटो अपलोड करने में मौके पर घंटों समय गुजारना पड़ रहा है। इस व्यवस्था ने फर्जीवाड़े पर शिकंजा कस दिया है।
शासन के दैवी आपदा एवं राहत विभाग ने आपदा प्रहरी एप पर आपदा राहत के लिए किए जा रहे कार्य की रिपोर्ट फोटो समेत मांगी है। ठंड में गरीबों को वितरित किए जा रहे कंबल व सार्वजनिक स्थलों पर जलाए जा रहे अलाव के स्थल की फोटो एप पर रोजाना डालने का निर्देश दिया है। इस एप पर फोटो लोड करने की पहली बार शुरू कार्य राजस्व कर्मियों के गले की फांस बन गया है।
अभी तक बिना अलाव जलवाए रिपोर्ट भेजने वाले कर्मियों को अब ठंड में मौके पर जाना पड़ रहा है। मौके से अलाव की फोटो अपलोड करनी पड़ रही है। कंबल वितरण की फोटो लाभार्थी के साथ अपलोड करनी पड़ रही है। एप की सुस्ती ने राजस्व कर्मियों को आमलोगों के बीच घंटों रहने पर मजबूर कर दिया है। अलाव की फोटो प्रहरी एप पर डालने में राजस्व कर्मियों के पसीने छूट गए हैं। स्थल पर कर्मचारियों को इंतजार करना पड़ रहा है।
दृश्य-1
शाम- 5:30 बजे
मोतिगरपुर। कस्बे के चौक पर जलवाए गए सरकारी अलाव की फोटो प्रहरी एप पर डालने के लिए शुक्रवार शाम 5:30 बजे प्रभारी लेखपाल लालबहादुर श्रीवास्तव और सहायक रमन वर्मा पहुंचे। अलाव सेंक रहे लोगों की फोटो खींचकर एप अपलोड करना शुरू किया। बार-बार अपलोड करने के दौरान एप लोकेशन नहीं ले रहा था। करीब साढ़े छह बजे तक दोनों राजस्व कर्मी फोटो लोड करने को खड़े रहे। प्रभारी लेखपाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को भी समस्या रही। अलाव सेंक रहे अनंत पाठक ने बताया कि पहले अलाव नहीं जलता था। एप की वजह से रोज अलाव जल रहा है। अमित अग्रहरि व ध्रुव ने बताया कि अलाव जलने से राहगीरों के साथ कस्बे के लोगों को भी ठंड से बचाव में राहत मिल रही है।
फोटो नहीं हुआ अपलोड तो नहीं माना जाएगा अलाव का जलना
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एस सुधाकरन ने बताया कि शासन से एप पर अलाव व कंबल वितरण की फोटो मौके से मांगी गई है। राजस्व कर्मियों को मौके से फोटो खींचकर उसे एप पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। फोटो नहीं मिलने पर उसे अलाव जलवाना नहीं माना जाएगा।