नोटबंदी के बाद जरूरी सेवाओं के लिए 500 के पुराने नोट को सीमित अवधि तक चलन में रखने का जिले में मिला-जुला असर दिख रहा है। सरकारी दफ्तरों के टैक्स काउंटर, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, पेट्रोल पंप पर लोगों ने 500 के पुराने नोट से जरूरी सुविधाएं लीं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को मुश्किलें झेलनी पड़ रहीं हैं। यहां तक कि बीज भंडारों पर पुराने नोट नहीं स्वीकार किए गए। इससे पहले से ही परेशान किसानों के सामने दिक्कत और बढ़ गई।
सरकार की ओर से नोटबंदी के बाद जरूरी सेवाओं के लिए 500 के पुराने नोटों के चलन की अवधि बढ़ाई गई है। शहर के सरकारी व गैर सरकारी प्रतिष्ठानों पर शुक्रवार को लोगों ने 500 रुपये के नोट से काम चलाया। नगर पालिका परिषद में करीब 10 लाख रुपये का टैक्स जमा किया गया, वहीं पावर कॉर्पोरेशन में भी बिजली बिल के लिए 500 रुपये के नोट जमा किए गए। बिजली के बिल के मद में डाकखाना उपकेंद्र पर करीब 12 लाख रुपये जमा किया गया।
रेलवे स्टेशन पर भी 500 रुपये के पुराने नोट देकर लोगों ने टिकट खरीदे। शहरी क्षेत्र के पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी पर 500 रुपये की पुरानी नोटों से लेन-देन किया गया। शहरी क्षेत्रों में जरूरी सेवाओं में 500 रुपये के नोट के चलन से जहां लोग राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों का बुरा हाल है। सरकारी बीज भंडारों किसानों से 500 रुपये का नोट नहीं लिया जा रहा है। बीज भंडार पर मौजूद कर्मचारी फुटकर पैसे की मांग रहे हैं। जनपद में कुल 15 राजकीय बीज भंडार हैं। इन बीज भंडारों पर 500 रुपये के नोट नहीं स्वीकार किए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि बैंक में कतार लगाने के बाद भी पैसे नहीं मिल रहे हैं।