सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह की मंशा परवान चढ़ी तो जिले की मृतप्राय ब्रह्मचारिणी और मझुई नदी में कलकल करती जलधारा दिखेगी। जिले की इन दोनों नदियों का अस्तित्व समाप्ति की ओर है। दोनों नदियों में बारिश के दिनों को छोड़ कभी भी पानी नहीं दिखता है। इन दोनों नदियों के पुनर्जीवित होने से इनके किनारे बसे ग्रामीणों को सहूलियतें मिलेंगी। सिंचाई मंत्री ने प्रदेश की विलुप्त होती नदियों के पुनजीर्वित करने की बात कही है। इसके लिए योजना बनाई जा रही है। हालांकि अभी मंत्री का निर्देश संबंधित विभागों में नहीं पहुंचा है।
ब्रह्मचारिणी नदी के दिन बहुरने के आसार
सिंचाई मंत्री ने प्रदेश के जिलों में जलस्रोतों को बढ़ाने के लिए विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी छोटी नदियों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रत्येक जिले की एक सहायक नदी के जलस्रोतों का विस्तार किया जाएगा। जिले के इतिहास पर नजर डाली जाय तो धनपतगंज विकास खंड क्षेत्र के गोमती नदी के तट के निकट स्थित केवटली गांव से निकली सहायक नदी ब्रह्मचारिणी का विस्तार करीब छह किलोमीटर के दायरे में था।
यह नदी केवटली गांव से विभिन्न स्थानों से होते हुए नौगवांतीर तक जाती थी। आसपास के गांव वाले इसी नदी से खेतों की सिंचाई का कार्य करते थे। सन 1952 में ब्रहृमचारिणी नदी गोमती नदी की मुख्यधारा से टूट गई। तब से नदी का विस्तार कराने को लेकर कोई प्रयास नहीं किया गया। चंदौर स्थित ब्रह्मचारी आश्रम के बाबा अवधेश दास ने कुछ वर्ष पूर्व ग्रामीणों की मदद से चंदौर से मुड़वा गांव तक ब्रह्मचारिणी नदी की सफाई का कार्य करवाया था। कमय के साथ नदी में सिल्ट जमा होने से अब नदी में पानी का बहाव नहीं हो पा रहा है।
मझुई नदी की भी जगी आस
कूरेभार से जयसिंहपुर, दोस्तपुर होते हुए मझुई (मंजूषा) नदी जौनपुर में जाकर गोमती नदी में मिल जाती है। वर्षों पुरानी यह नदी देखरेख व कम बारिश के अभाव में सूख गई। करीब दो सैकड़ा से अधिक गांव को पानी उपलब्ध कराने वाली इस नदी का अब अस्तित्व ही समाप्ति के कगार पर है। सिंचाई मंत्री के निर्णय से इस नदी का दिन भी बहुरने के आसार हैं।