सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों को लकदक करने की योजना ऑपरेशन कायाकल्प सरकारी आदेशों के बीच पिस कर रह गई है। पंचायती राज निदेशक के पत्र पर सुस्त हुई योजना को अब अपर मुख्य सचिव ने शुरू कराने का निर्देश जारी किया है।
जिले में 1735 प्राथमिक विद्यालय व 612 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। ग्राम पंचायत निधियों से परिषदीय विद्यालयों के सौंदर्यीकरण कराने की योजना में सरकारी आदेश ही बाधा बन रहे हैं। पूर्व में स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरन आनंद ने ग्राम पंचायत निधियों से परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प योजना संचालित कराने का निर्देश दिया था।
योजना को अमलीजामा पहनाए जाने की तैयारी हो ही रही थी कि पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह का एक पत्र आ गया। इसमें ग्राम पंचायतों को पहले पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय बनाने का आदेश दिया गया। उसके बाद ही परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प योजना चलाने का आदेश दिया गया।
पंचायती राज निदेशक के इस पत्र के बाद ऑपरेशन कायाकल्प योजना का काम ठंढा पड़ गया था। अब शासन के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह ने पत्र जारी कर फिर से परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प कराने का निर्देश दिया है। स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरन आनंद ने भी कायाकल्प का काम तीव्र गति से कराने का निर्देश दिया है।
ऑपरेशन कायाकल्प योजना के कामों में तेजी लाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी अतुल वत्स ने बेसिक शिक्षा एवं पंचायतीराज विभाग की संयुक्त बैठक कर अधिकारियों के पेंच कसे। सीडीओ ने ऑपरेशन कायाकल्प योजना के कामों में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में बीएसए, सभी डीसी, सभी एडीओ पंचायत व योजना से जुड़े लोग शामिल रहे। सीडीओ ने अधिकारियों को ऑपरेशन कायाकल्प योजना का काम शीर्ष प्राथमिकता पर कराने का निर्देश दिया। साथ ही इसकी रणनीति बनाने का भी निर्देश दिया।
परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक चाहते हैं कि उनका विद्यालय जल्द ही ऑपरेशन कायाकल्प योजना के जरिए संतृप्त हो जाए। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय ने कहा कि शिक्षक स्वयं के संसाधन से विद्यालय को सुंदर बनाने का प्रयास कर रहे थे।
कायाकल्प योजना से उनको आस जगी थी लेकिन पंचायत विभाग के दांव पेंच ने कायाकल्प के सपनों को धराशाई कर दिया है। स्कूलों का कायाकल्प प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए। ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों की सूरत बदल जाएगी। शिक्षकों को पढ़ाने का अच्छा माहौल मिलेगा। साथ ही बच्चे भी कॉन्वेंट विद्यालयों की तर्ज पर स्कूलों में पढ़ाई कर सकेंगे।