प्रियंका चाहती हैं कि रेहान यह समझें कि रईसी के अलावा भी कोई जिंदगी होती है, जो गांवों में बसती है। बिना उसकी समझ के समग्र भारत को नहीं जाना जा सकता। प्रियंका की यह कोशिश को भविष्य में बेटे को सियासत की दुनिया में दाखिल कराने की योजना के रूप में भी देखी जा रही है।
गांव-गिरांव की मड़ई हो या फिर शहर की अट्टालिका, प्रियंका वाड्रा हर जगह बखूबी घुल-मिल जाती हैं। ग्रामीण जीवन के रहन-सहन की गहरी समझ ही उन्हें लोगों का मुरीद बना देती है। इसी व्यवहारिक जीवन की समझ वे अपने बच्चों में भी विकसित करना चाहती हैं।
वे चाहती हैं कि उनके बच्चे ग्रामीण जीवन को अच्छी तरह समझें। ग्रामीणों का रहन-सहन देखें। उनका खान-पान देखें। बच्चे यह समझें कि सिर्फ रईसी ही जीवन नहीं है। अपनी इसी सोच के तहत उन्होंने अपने बेटे रेहान को ग्रामीण जीवन की समझ विकसित करने का एसाइनमेंट दे रखा है।
बचपन में अपनी मां प्रियंका वाड्रा, मामा राहुल गांधी और नानी सोनिया गांधी की उंगली पकड़कर अमेठी पहुंचने वाले रेहान ने इसके लिए रायबरेली और अमेठी का चयन किया है। इसी कवायद के तहत रेहान पांच जुलाई को अमेठी पहुंचे। उन्होंने गौरीगंज के कौहार गांव में स्वयं सहायता समूह से जुड़े लोगों के साथ रात बिताई। वहीं खाया-पीया।
दूसरे दिन वे रायबरेली चले गए। छह तारीख की रात उन्होंने रायबरेली जिले के एक गांव में बिताई। सात जुलाई को वहीं से दिल्ली चले गए। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक सूत्र ने बताया कि बीते लोकसभा चुनाव के बाद रेहान का अमेठी और रायबरेली का यह तीसरा दौरा है।
इसके पहले प्रियंका वाड्रा की बेटी मिराया भी अमेठी आ चुकी हैं। हालांकि सुरक्षा के दृष्टिगत प्रियंका वाड्रा के बच्चों के अमेठी आने की जानकारी अति गोपनीय रखी जाती है। यहां तक कि जिला प्रशासन और कांग्रेस के बड़े नेताओं तक को इसकी भनक नहीं लगती।