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दोहरा शतक मारने को बेताब दिख रहा सरसों का तेल

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सुल्तानपुर। वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौर में खाद्य तेलों का दाम आसमान को छू रहा है। रिफाइंड व वनस्पति घी का रेट भी बढ़ गया है। खाद्य तेलों के बढ़े दाम से महिलाओं की रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। आम आदमी के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने आम जनजीवन को एक बार फिर से प्रभावित कर दिया है। कोरोना का असर जरूरत के सामानों पर भी दिख रहा है। खाद्य तेल व दाल से लेकर अन्य सामानों की कीमतों में इजाफा देखा जा रहा है।
लगातार महंगाई बढ़ रही है। महिलाओं के किचन का बजट बिगड़ रहा है। 140 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला सरसों का तेल इस समय 180 रुपये तक पहुंच गया है। किराना की दुकान चलाने वाले आकाश तिवारी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में सभी सामान महंगा हो गया है।
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जब सामान अधिक रेट में मिलेगा तो मजबूरन ग्राहकों को बढ़े दाम में बेचना पड़ेगा। वर्तमान में सरसों का तेल 180 रुपये प्रति लीटर के भाव बेचा जा रहा है। रिफाइंड 130 से 150 रुपये प्रति लीटर व नवस्पति घी 155 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से ग्राहकों को दिया जा रहा है।
इसके अलावा फुटकर में अरहर की दाल 120 रुपये किलो, चीनी 42 रुपये किलो व आटा 26 से 28 रुपये किलो बिक रहा है। बड़े दुकानदारों का कहना है कि खाद्य तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।
कुछ कंपनियों का इस पर एकाधिकार है और वे मनमाने तरीके से दाम बढ़ाती जा रही हैं। खाद्य तेलों व दाल की बढ़ती कीमतों की वजह से आम आदमी को घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सरसों के तेल का दाम इतना बढ़ गया है कि महिलाएं दाल में तड़का लगाना भी भूल गई हैं।
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