सुल्तानपुर। किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में अभियोजन पक्ष अदालत में केस साबित नहीं कर पाया। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत के न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा ने टिप्पणी करते कहा कि महज संभावनाओं पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया है। केस की सुनवाई के दौरान दुष्कर्म पीड़िता गवाही देने से मुकर गई थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय के मुताबिक चांदा थाने के एक गांव की किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में 10 अगस्त 2015 को गांव के ही मोनू यादव उर्फ दीपक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह कोर्ट में पेश किए गए। गवाही में दुष्कर्म पीड़िता ने कहा कि वह आरोपी को पहचान नहीं पाई थी। लोगों के कहने पर आरोपी का नाम बता दिया था।
इसके अलावा पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में मारपीट व दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी। करीब आठ साल तक चले मुकदमे के बाद आरोपी को कोर्ट से राहत मिल गई और उसे साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।