सुल्तानपुर। चार दिन तक तेज हवा के साथ हुई बारिश से जिले में 28,045 हेक्टेयर धान की अगेती फसल खेतों में गिर गई। कृषि विभाग ने करीब 20 फीसदी नुकसान का आकलन किया है। केला, उड़द, मूंग, अरहर समेत अन्य फसलें भी प्रभावित हुई हैं। सोमवार को बारिश थमने से मौसम साफ हुआ, लेकिन गोमती का जलस्तर बढ़ने से तराई क्षेत्रों में बाढ़ और कटान का खतरा बना हुआ है।
उप कृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक जिले में 1,00,800 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। उड़द में 15.55 और मूंग व अरहर में करीब 16.65 फीसदी नुकसान का आकलन है। मक्का, श्रीअन्न, तिल, बाजरा और ज्वार भी प्रभावित हुए हैं। जिला उद्यान अधिकारी रामअकबाल यादव ने बताया कि 120 हेक्टेयर केले में 10 से 12 फीसदी नुकसान हुआ है। जलभराव से शिमला मिर्च, गोभी, टमाटर, बैंगन और हरी मिर्च की नर्सरी भी खराब हुई है। 6,894.187 हेक्टेयर गन्ने में मामूली क्षति हुई है।
लंभुआ के नेवादा में सड़क पर पानी जमा है। भदैंया के करोमी में सोनी का कच्चा मकान गिरने से अनाज व घरेलू सामान खराब हो गया। लेखपाल ने दैवी आपदा सहायता का आश्वासन दिया।
गोमती उफनाई, फसलें डूबीं: बल्दीराय के इसौली में कलीम, अलीम, कुंज बिहारी, हरि निषाद और अन्नू यादव समेत किसानों की फसलें डूब गईं। ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थान की व्यवस्था मांगी है।
कटान से घर आठ मीटर दूर: धनपतगंज के बगियवा में कटान तेज है। सुदामा देवी का घर नदी से आठ मीटर दूर रह गया है।
जलस्तर: खतरा स्तर 84.735 मीटर है। दोपहर एक बजे गोमती 82.820 मीटर पर थी।
मौसम विज्ञानी भूपेंद्र सिंह पटेल ने अगले 24 घंटे मौसम साफ रहने की संभावना जताई है।