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अमेठी नहीं छोड़ने का मैसेज दे गए राहुल गांधी

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अमेठी। लोकसभा चुनाव में शिकस्त के बाद पहली बार अमेठी पहुंचे राहुल गांधी ने करीब एक घंटे कार्यकर्ताओं के बीच अपनी कही और उनकी सुनी। बृहस्पतिवार से विधानसभा क्षेत्रवार उनकी हार की समीक्षा का दौर भी शुरू हो जाएगा।
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समीक्षा के नतीजे भले ही कुछ निकलें लेकिन राहुल गांधी के दौरे ने एक बात तय कर दी कि वे अमेठी नहीं छोड़ने वाले हैं। इसी के साथ सियासी हलके में चल रही उनके अमेठी छोड़ने की अटकलों और आशंकाओं पर भी विराम लग गया।
पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने केरल के वायनाड से भी नामांकन का निर्णय लिया तो अमेठी के मतदाताओं से लेकर सियासी हलके तक में इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि वे दोनों स्थानों से जीतने पर कौन सी सीट छोड़ेंगे।
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विपक्षी प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने जनता के बीच इस बात को पुरजोर ढंग से पेश किया कि वे अमेठी से पलायन कर रहे हैं। नतीजे आए तो जनता ने ही राहुल के बजाय स्मृति ईरानी को चुन लिया।
फिर छोड़ने के विकल्प की बात ही नहीं रह गई लेकिन यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि वे अब अमेठी नहीं आएंगे। बुधवार को पराजय की समीक्षा के बहाने अमेठी पहुंचे राहुल गांधी ने न मीडिया से बात की और न ही जनता के बीच गए।
सीमित दायरे में अपनी कही और कांग्रेसियों की सुनी। उनके निर्देश पर बृहस्पतिवार से विधानसभा क्षेत्रवार हार की समीक्षा भी शुरू हो जाएगी।
समीक्षा में क्या कुछ निकल आएगा यह भले ही अभी भविष्य की बात हो लेकिन राहुल के एक दिवसीय दौरे ने जनता व विपक्षी दलों को यह मैसेज दे दिया कि वे अमेठी छोड़ने वाले नहीं हैं।
उन्होंने न केवल अमेठी से अपने पारिवारिक रिश्ते को दोहराया बल्कि एक आवाज पर खुद के हाजिर होने की बात कही। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी यहां की जनता के लिए आवाज उठाने के साथ ही पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने का जिम्मा सौंपा। कहा कि वे और प्रियंका अमेठी आते रहेंगे।
बैठक के दौरान राहुल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के साथ ही यहां के लोगों की समस्याओं को लेकर संघर्ष करें। इसमें कहीं भी उनकी आवश्यकता पड़े तो बताने में संकोच न करें। कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएं।
बैठक में मौजूद कांग्रेस नेता करण वाजपेयी व शोभनाथ यादव ने राहुल गांधी से अमेठी में बने रहने की अपील की। नेताओं ने कहा कि धनबल और बाहुबल के आगे हम चुनाव हार गये। हमारा अति आत्मविश्वास भी हम पर भारी पड़ा। हम फिर लड़ेंगे और जीतेंगे।
बैठक में पहले वाली बात नहीं दिखी। कार्यकर्ताओं की बातें सुनने और फिर उन्हें संबोधित करने के दौरान उनके चेहरे पर हार का दर्द साफ नजर आया। उनकी बातें सुनकर कई बार कार्यकर्ता भी भावुक हो गये। इस बीच कुछ लोगों ने उनसे अमेठी नहीं छोड़ने के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहने की भी गुजारिश की।
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