गौरीगंज। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के जमीन हथियाने के आरोपों के बाद चौतरफा हमले झेल रही राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। शुक्रवार को नए तथ्यों के साथ सामने आए भाजपा नेता के दावों पर यकीन करें तो ट्रस्ट ने न सिर्फ नीलामी हासिल करने के लिए मेसर्स सम्राट बाइसकिल लिमिटेड से दुरभि संधि की बल्कि रजिस्ट्री दफ्तर में प्रस्तुत डीड में भूमि पर मालिकाना हक के साथ उसे किसी भी प्रयोजन में लाने की शर्त भी जोड़ी है। उन्होंने मामले में यूपीएसआईडीसी की भूमिका को संदेह के घेरे में बताने के साथ ही कई अन्य तथ्यों को सामने लाकर राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के बहाने कांग्रेस उपाध्यक्ष पर सीधा हमला बोला।
केंद्र सरकार की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 23 अगस्त को अमेठी के अपने एक दिवसीय दौरे में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर गौरीगंज तहसील के कौहार गांव में किसानों की 65.57 एकड़ (करीब 105 बीघा) जमीन हड़पने का आरोप लगाया था। स्मृति के बयान से आए सियासी भूचाल के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने गांधी परिवार के राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट पर लग रहे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि पूरी जमीन हाईकोर्ट के आदेश पर हुई नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शी तरीके से हासिल की गई है।
कांग्रेस नेताओं के बयान के बाद शुक्रवार को मीडिया के सामने आए अधिवक्ता व भाजपा नेता उमाशंकर पांडेय ने राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ ही गांधी परिवार को भी कटघरे में खड़ा किया। पांडेय का आरोप था कि राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने सम्राट बाइसकिल लिमिटेड की बेशकीमती जमीन को कौड़ियों के भाव हासिल करने के लिए भूमि के पट्टाधारक जैन बंधुओं के साथ दुरभिसंधि की।
इतना ही नहीं नीलामी प्रक्रिया के तहत जमीन लेने के बाद राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने गौरीगंज के रजिस्ट्री दफ्तर में प्रस्तुत डीड की धारा-8 में ट्रस्ट को भूमि का स्वामी बताते हुए इस भूमि के किसी भी तरह के उपयोग के अलावा इसे बेचने व किराए पर देने के अधिकार की बात कही है। पांडेय के मुताबिक ट्रस्ट की डीड की धारा-8 में किया गया उल्लेख बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। यूपीएसआईडीसी से अधिग्रहीत भूमि पर न तो किसी का स्वामित्व हो सकता है न ही वह औद्योगिक कार्यों के अलावा किसी अन्य प्रकार के प्रयोजन में लाई जा सकती है।