सुल्तानपुर। दहेज हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार को हत्यारे पति को आजीवन कारावास और सास-ससुुर 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों पर सात-सात हजार रुपये जुर्माना किया है। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में ननद समेत चार ससुरालीजनों को बरी कर दिया है। मामला गोसाईगंज थाने के इटकौली गांव से जुड़ा है।
गांव निवासी हासिम उर्फ पप्पू की शादी वर्ष 2010 में गोसाईगंज थाने के ग्राम चौधरी का पुरवा मजरे अर्जुनपुर निवासी साजिदा बेगम की पुत्री सकीना बेगम के साथ हुई थी। ससुरालीजन शादी के बाद से ही सकीना को कम दहेज लाने का ताना देकर प्रताड़ित करते थे और उसे मारपीट कर उसके मायके वालों से अपनी मांग को पूरा करने के लिए दबाव बनाते थे।
आरोप है कि ससुरालीजनों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर सात अप्रैल 2012 को सकीना को जलाकर मार डाला था। पुलिस ने मृतका की मां साजिदा बेगम की तहरीर पर आरोपी पति हासिम उर्फ पप्पू, ससुर मो. कसीम, सास मैमून निशा, देवर नासिर, बाबू, शानू, ननद गुड़िया व खुशनूर के खिलाफ दहेज हत्या का केस दर्ज किया था।
विवेचना में पुलिस ने खुशनूर का नाम केस से निकाल दिया था, जबकि पति समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मनोज दुबे व अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा ने घटना को साबित करने के लिए आठ गवाहों को कोर्ट में पेश किया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय की न्यायाधीश पूनम सिंह ने साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बृहस्पतिवार को अभियुक्त पति हासिम उर्फ पप्पू को आजीवन कारावास और सास मैमून निशा व ससुर मो. कसीम को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाकर जेल भेजने का आदेश दिया है। आरोपी देवर नासिर, बाबू, शानू व ननद गुड़िया को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।