ढाखापुर उपकेंद्र के खराब पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर को समय से कंपनी को मरम्मत के लिए वापस नहीं करके अधिकारियों ने पावर कॉर्पोरेेशन को करीब 37 लाख रुपये की चपत लगाई है। अमर उजाला के खुलासे के बाद भी प्रशासनिक से लेकर निगम के अधिकारी नहीं चेते।
लापरवाही का यह आलम रहा कि निगम के अधिकारियों ने वारंटी पीरियड बीतने के बाद ट्रांसफार्मर की जांच कराई और उसे कंडम घोषित करा दिया। इसमें कंपनी के साथ निगम के इंजीनियरों की मिलीभगत बताई जा रही है।
4 अगस्त 2016 के अंक में अमर उजाला ने खराब ट्रांसफार्मर से अब लाखों के खेल की तैयारी शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इंजीनियरों की इस कारस्तानी का खुलासा किया था। खबर में ट्रांसफार्मर की मरम्मत करने वाली कंपनी की वारंटी तिथि 7 अगस्त को बीतने का खुलासा भी किया गया था।
साथ ही यह भी आशंका जताई गई थी कि इंजीनियर इस तिथि के बीतने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद भी जिले के आला अफसरान से लेकर निगम के इंजीनियर तक नहीं चेते। बिजली नहीं मिलने से आक्रोशित लोगों ने जब ढाखापुर उपकेंद्र पर 9 अगस्त को धरना-प्रदर्शन शुरू किया तो अवर अभियंता सुरेंद्र यादव के साथ जांच करने पहुंचे सहायक अभियंता टेस्ट अनिल कुमार वर्मा ने पांच एमवीए के ट्रांसफार्मर को कंडम घोषित कर दिया।
ट्रांसफार्मर कंडम घोषित होने से पूर्व में इसकी मरम्मत करने वाली कंपनी वारंटी पीरियड में मरम्मत करने के कार्य से बच गई। साथ ही अब विद्युत आपूर्ति के लिए पावर कॉर्पोरेशन को नया पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर लगाना पड़ेगा।
निगम के इंजीनियरों के मुताबिक मौजूदा समय में पांच एमवीए के नए ट्रांसफार्मर की कीमत करीब 37 लाख रुपये है। नया ट्रांसफार्मर लगाने पर अब कॉर्पोरेशन को 37 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
आश्चर्यजनक यह है कि ट्रांसफार्मर की तकनीकी जांच करने वाले कंपनी के लोगों की रिपोर्ट को भी नीचे से लेकर अभियंता द्वितीय तक दबाए रहे और वारंटी का समय बीतने का इंतजार करते रहे।
मुख्य अभियंता विद्युत फैजाबाद अशोक कुमार सिंह का कहना है कि वारंटी पीरियड में ट्रांसफार्मर वापस नहीं करना गंभीर मामला है। इसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी कि ऐसा क्यों नहीं किया गया। जरूरत पड़ने पर जांच कराकर लापरवाहों पर कार्रवाई भी होगी।