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गोमती नदी में गिर रहा कचरा, वाहन उगल रहे जहर

Tue, 08 Dec 2015 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी जिले में प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। खासकर नालों का कचरा नदियों में गिरने से जलीय जीवों को खतरा उत्पन्न हो गया है। एक बार बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटना के बाद भी प्रशासन व नियंत्रण बोर्ड इस पर अंकुश नहीं लगा सका है।
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नालों का कचरा अभी भी नदी में गिर रहा है। रिजेक्ट हो चुके वाहन धुएं से हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। कुछ ईंट भट्ठे भी आदेशों की अवहेलना कर छोटी चिमनी से संचालित हो रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई कार्यालय नहीं होने से जल एवं वायु प्रदूषण रोकने के नाम पर केवल खानापूरी हो रही है।


प्रदूषण से गोमती नदी का पानी जहरीला हो रहा है। इसको बचाने का अभी तक कोई उपाय जिले में नहीं किया गया है। यही हाल हवा के प्रदूषण को रोकने का भी है। जिले में शहर से लेकर देहात तक के नालों का प्रदूषित पानी रोजाना गोमती नदी में गिर रहा है। शहर में कोई सीवर प्लांट नहीं होने से नालों का प्रदूषित पानी नदी में गिरने से नहीं रुक पा रहा है। ऊपर से जगदीशपुर स्थित कुछ फैक्ट्रियों का दूषित पानी गिरने से गोमती नदी का पानी और प्रदूषित हो रहा है। यही हाल वायु प्रदूषण का भी है।
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 जिले में प्राइवेट वाहन ही नहीं परिवहन निगम की भी रिजेक्ट बसें भी सड़क पर फर्राटा भर रही हैं। रिजेक्ट वाहनों का जहरीला धुआं हवा को प्रदूषित कर रहा है। जिले में चोरी-छिपे कुछ ईंट भट्ठे भी छोटी चिमनियों के सहारे संचालित हो रहे हैं।

प्रदूषण से गोमती में मर चुकीं हजारों मछलियां
करीब एक वर्ष पहले जगदीशपुर क्षेत्र की एक फैक्ट्री का प्रदूषित कचरा नाले में छोड़े जाने से हजारों की तादाद में गोमती नदी की मछलियां एवं अन्य छोटे जलीय जीव मर गए थे। प्रकरण प्रकाश में आने पर रायबरेली स्थित प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय व प्रशासिनक अफसरों ने जांच कराने की बात कही थी। प्रकरण ठंडा होते ही जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई।
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