सुल्तानपुर। सावन मास के दूसरे सोमवार को शिव मंदिर हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठे। शहर व ग्रामीण इलाकों के शिवालयों पर जलाभिषेक के लिए शिव भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं व युवतियों ने मनोकामना पूरी करने के लिए दिन भर निर्जल व्रत भी रखा। सीताकुंड घाट पर रुद्राभिषेक कर लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की।
मान्यता है कि सावन मास में भगवान शिव की अपने भक्तों पर विशेष कृपा रहती है। इसी मान्यता के आधार पर सावन माह के दूसरे सोमवार को महिलाओं व युवतियों ने निर्जल व्रत रखा। दिन भर शिवालयों में दर्शन पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
सोमवार को भोर से ही शिवालयों में शिव भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। शहर की अधिकांश महिलाओं व युवतियों ने सीताकुंड घाट पर स्थित विवेकानंद हाल में हनुमानगढ़ी के पुजारी पं. रमाकांत पांडेय से रुद्राभिषेक कराया।
शहर के सीताकुंड स्थित पारिजात वृक्ष, शाहगंज चौराहा स्थित शिव मंदिर व रामलीला परिसर में स्थित शिव मंदिर में भक्तों ने बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, दूध व शहद का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। सुबह से शाम तक सभी शिवालयों पर पूजन-अर्चन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। भगवान शिव के जयकारे से सभी शिवालय गूंज उठे। उधर, ग्रामीण क्षेत्र के शिव मंदिरों में भी सोमवार को जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की भीड़ रही।
सावन में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व
शहर के शाहगंज चौराहा स्थित लाला बैजूशाह मंदिर के पुजारी व कथा व्यास बृजेशाचार्य महराज ने बताया कि सावन माह में रुद्राभिषेक का खास महत्व है। कष्टों के निवारण और दीर्घायु के लिए रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप को रामबाण माना गया है। सावन माह के दौरान भगवान विष्णु शयन में होते हैं। इसलिए भगवान शिव ही सृष्टि के संचालक होते हैं।