एक सप्ताह पहले हुई युवक की हत्या के मामले ने रविवार को तूल पकड़ लिया। नामजद दो आरोपियों को छोड़ने से नाराज ग्रामीणों ने कोतवाली का घेराव कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों और पुलिस में तीखी नोकझोंक हुई। सीओ ने हत्या की विवेचना दोबारा कराने का आश्वासन दिया, तब जाकर करीब दो घंटे बाद मामला शांत हुआ।
मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के पूरे बड़गइयन ऊंचगांव निवासी सुनील दुबे (28) पुत्र संगम प्रसाद दुबे की पत्नी निशा गर्भवती थी। परिवारीजनों ने निशा को सीएचसी मुसाफिरखाना में भर्ती कराया था, जहां बीते 16 अक्तूबर को निशा ने एक बेटे को जन्म दिया था।
देर रात सुनील पत्नी और नवजात शिशु को देखकर बाइक से घर लौट रहा था। रास्ते में उसकी हत्या कर खड़सा मोड़ के पास झाड़ी में शव फेंक दिया गया था। पुलिस ने मृतक के भाई राकेश की तहरीर पर दो लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था।
हत्या की विवेचना तत्कालीन एसओ रहे शिवमुनि यादव कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन एसओ ने हत्या में शामिल दोनों आरोपियों से मोटी रकम लेकर छोड़ दिया। इस बीच शिवमुनि यादव का स्थानांतरण गैर जनपद हो गया।
पुलिस की ओर से नामजद आरोपियों को छोड़े जाने से नाराज ग्रामीणों ने रविवार सुबह कोतवाली का घेराव कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कोतवाली का घेराव करने को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
कोतवाली के प्रभारी राम आसरे ने आक्रोशित ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं था। मृतक के परिवारीजन व ग्रामीण पुलिस से यह जानने की जिद पर आमादा थे कि किन परिस्थितियों में नामजद आरोपियों को पुलिस ने छोड़ा।
ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हुए तो सीओ मुसाफिरखाना को सूचित किया गया। सूचना पर पहुंचे सीओ सिद्धार्थ तोमर ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि आईओ का स्थानांतरण हो गया है। इसलिए मामले की विवेचना अब नए कोतवाली प्रभारी को दी जाएगी। संदिग्धों से पूछताछ करना जांच का हिस्सा है।