एक अस्पताल में इलाज कराते केएनआईटी के प्रो.एसपी कुटार।-स्रोत शोशल मीडिया
सुल्तानपुर। कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान (केएनआईटी) में वेतन निर्धारण पर करीब दो वर्षों से चल रहा विवाद टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। प्रमोशन मिलने के बावजूद छह शिक्षकों को नया वेतनमान नहीं मिलने से नाराजगी लगातार बढ़ रही है। मामला सुप्रीम कोर्ट और शासन की गाइडलाइन के बीच फंसा हुआ बताया जा रहा है।
विवाद उस समय और गहरा गया जब एसोसिएट प्रोफेसर एसपी कुटार ने निदेशक के सामने बुधवार शाम आत्महत्या की चेतावनी दे दी। बृहस्पतिवार को वह संस्थान में मूर्छित भी हो गए, जिसके बाद सहकर्मियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया,जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। कुटार का आरोप है कि लंबे समय से प्रमोशन के बावजूद उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा, जबकि उनके साथ पदोन्नत अन्य शिक्षकों को इसका लाभ मिल रहा है।
घटनाक्रम के बाद निदेशक प्रोफेसर राजीव कुमार उपाध्याय ने वित्त एवं लेखा अधिकारी को पत्र जारी कर मामले में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। स्पष्ट किया कि प्रशासकीय परिषद की 63वीं बैठक में वेतन निर्धारण को मंजूरी दी जा चुकी है, लेकिन संबंधित प्रपत्रों पर हस्ताक्षर न होने से प्रक्रिया अधर में लटकी है। वित्त एवं लेखा अधिकारी विपिन द्विवेदी का कहना है कि वेतन निर्धारण में न्यायालय और शासन के नियमों का पालन नहीं किया गया है, इसलिए उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए। उन्होंने इसे नियम विरुद्ध दबाव बताया है।