अमहट। मेडिकल कॉलेज में सोमवार को मरीजों की भारी भीड़ के आगे व्यवस्थाएं दिनभर हांफती नजर आईं। सुबह ओपीडी खुलने से पहले ही पंजीकरण काउंटरों पर लंबी कतारें लग गई थीं। इसके बाद पैथोलॉजी, विभिन्न विभागों की ओपीडी और दवा वितरण केंद्र तक हर जगह मरीजों और तीमारदारों की भीड़ रही। कई मरीजों को परचा बनवाने से लेकर दवा लेने तक करीब तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
पुरुष अस्पताल में 2,208 मरीजों का पंजीकरण हुआ, जबकि महिला अस्पताल में 501 मरीज पहुंचे। दोनों अस्पतालों को मिलाकर कुल 2,709 मरीजों ने उपचार कराया। भीड़ का सबसे अधिक दबाव अस्थि रोग विभाग में रहा, जहां करीब 160 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। दवा वितरण काउंटर और पैथोलॉजी में भी लोगों की लंबी कतारें देर तक बनी रहीं। ऑनलाइन ओपीडी परचा बनाने की व्यवस्था रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।
अस्पताल में कई बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ आए तीमारदार भी लंबी कतारों में परेशान दिखे। मरीजों का कहना था कि बढ़ती ओपीडी के अनुपात में पंजीकरण और दवा वितरण काउंटर बढ़ाए जाएं तथा ऑनलाइन व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाया जाए, जिससे लोगों को घंटों इंतजार न करना पड़े।
अव्यवस्था से जूझते दिखे लोग
विवेक नगर निवासी दीपक दुबे ने बताया कि सुबह अस्पताल पहुंचने के बाद पर्चा बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने तक हर जगह लाइन में लगना पड़ा। सबसे अधिक समय पंजीयन व दवा वितरण काउंटर पर लगा। राजापुर निवासी जियावन पाल ने बताया कि पैर में चोट के इलाज के लिए आए थे, लेकिन भीड़ के कारण चिकित्सक तक पहुंचने में काफी देर हो गई।
ऑनलाइन व्यवस्था पर फिर भारी पड़े मैनुअल परचे
सोमवार को कुल 2,709 मरीजों के पंजीकरण में सिर्फ 415 ऑनलाइन परचे बने, जबकि 2,294 मरीजों के मैनुअल परचे तैयार किए गए। पुरुष अस्पताल में 2,208 पंजीकरण में 363 ऑनलाइन और 1,845 मैनुअल, जबकि महिला अस्पताल में 501 पंजीकरण में 52 ऑनलाइन और 449 मैनुअल परचे बनाए गए। आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था के बावजूद अधिकांश मरीज अब भी पारंपरिक मैनुअल प्रणाली पर ही निर्भर हैं।
मेडिकल कॉलेज में दवा काउंटर पर लगी कतारें।