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Sultanpur News: जिले की 25 फीसदी जनता के लिए सिर्फ तीन बसें

Sat, 06 Jul 2024 02:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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सुल्तानपुर। जिला मुख्यालय से हलियापुर जाने के दो प्रमुख रूटों से जिले की 25 फीसदी जनता गुजरती है। हजारों दैनिक यात्री इस रूट से जिला मुख्यालय आते-जाते हैं, लेकिन परिवहन निगम की कमजोरी से यात्रियों को निजी वाहनों में ही सवारी करनी पड़ती है। इन रूटों पर केवल तीन रोडवेज बसें चल रही हैं। प्राइवेट वाहनों से लोगों को जहां ज्यादा किराया भी देना पड़ता है, वहीं समय भी ज्यादा लगता है।
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हलियापुर से सुल्तानपुर वाया कूरेभार रूट करीब 56 किलोमीटर लंबा है। इस रूट पर केवल एक ही रोडवेज बस चलती है, वह भी ऐसे समय पर आती-जाती है, जब दैनिक यात्री इस पर न बैठ सकें। इस रूट पर रोडवेज अफसरों ने घाटे का बहाना बनाकर एक बस बंद कर दी थी, जबकि इस रूट पर एक दर्जन बसें दिनभर अप-डाउन करती हैं, जो अच्छा खासा मुनाफा कमा रही हैं। यही हाल हलियापुर वाया पाराबाजार का भी है। जहां केवल एक बस हलियापुर तक चलती है, वह भी सुबह साढ़े छह बजे हलियापुर से जिले के लिए आती है जो दैनिक यात्रियों के लिए मुनासिब समय नहीं है। दूसरी बस केवल बल्दीराय तक ही जाती है।


लोग बोले, 10 किलोमीटर का 40 रुपये किराया
कुडवार/बिंदेश्वरीगंज। ऐंजर गांव के बृजेश दुबे बताते हैं कि हम लोगों को मुकदमे की पैरवी के लिए सुल्तानपुर जाना पड़ता है। साधन न होने से बड़ी दिक्कत है। सरकारी बसे भी नहीं चल रही हैं। अधिवक्ता राजकरन यादव बिंदेश्वरीगंज निवासी बताते हैं कि इनकम टैक्स विभाग में प्रैक्टिस करते हैं। घर से सुल्तानपुर आने-जाने में समय और कीमत ज्यादा लग रही है। रोडवेज बस चलाई जानी चाहिए। अधिवक्ता बद्री शुक्ला कहते हैं कि बल्दीराय तहसील व सुल्तानपुर सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करता हूं, घर बल्दीराय के पास होने के नाते शहर पहुंचना मुश्किल हो गया है। एक तरफ से 100 रुपये खर्च करता हूं तो सुल्तानपुर मुख्यालय पहुंचता हूं। भवानीगढ़ बाजार सूर्यभान मिश्रा बताते हैं कि हलियापुर से शहर जाने के लिए प्राइवेट सवारी बेहद महंगी है। सरकारी बच चलती नहीं है। केवटली निवासी रामधीरज द्विवेदी ने बताया कि हलियापुर से सुल्तानपुर के लिए कोई परिवहन निगम की बस नहीं चलने से भारी समस्या है। विनोद सिंह सरकौड़ा कहते हैं कि किराया भी ज्यादा लग रहा है और समय भी ज्यादा लगता है। प्राइवेट बसों से 10 किलोमीटर का किराया 40 रुपये लिया जाता है। प्रेमचंद का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों से मांग की गई, लेकिन वादे ही हाथ आए।
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जिम्मेदार बोले
जनता की सुविधा के लिए यदि सरकारी बसें नहीं चल पा रही हैं तो उन्हें हम स्थानीय अधिकारियों से बात करेंगे। साथ ही इस मामले को सदन में भी उठाएंगे। रोडवेज बसों की संख्या बढ़नी चाहिए।
- मो. ताहिर खान, विधायक


मैं अभी नया हूं, बहुत भौगोलिक जानकारी नहीं है। किंतु जिन रूटों पर यात्री निकलते हैं और वहां फायदा हो सकता है, उन सभी रूटों पर रोडवेज बसें चलाने का प्रस्ताव बनाकर चलवाया जाएगा।
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- विनोद शुक्ला, सहायक महाप्रबंधक, परिवहन निगम
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