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66 फैक्ट्रियों में मात्र सात का नवीनीकरण

Tue, 29 Sep 2015 11:47 PM IST
सुल्तानपुर/अमर उजाला ब्यूरो
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अविभाजित जिले (अमेठी जिले की तीन तहसीलों समेत) में पटाखा व्यवसाय का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। 13 वर्ष में  हुई 32 मौतों के बाद भी जिला प्रशासन इस अवैध कारोबार को बंद कराने के प्रति संजीदा नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से मौतों से किए जा रहे सौदे की पोल फायर महकमे की रिपोर्ट खोल रही है।
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फायर महकमे के मुताबिक जिले मेें संचालित 66 पटाखा फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों में मात्र सात का नवीनीकरण हुआ है। 59 का नवीनीकरण आज तक लंबित है। घटनाओं  के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे किए लेकिन वक्त के साथ सब हवा हो गए। 

सीएफओ आरएस मिश्रा ने बताया कि पटाखा व्यवसायी को अपने लाइसेंस के नवीनीकरण से पूर्व फायर विभाग से एनओसी लेनी होती है। प्रत्येक पटाखा कारोबारी का लाइसेंस दो वर्ष तक वैध होता है। उसके बाद नवीनीकरण कराना पड़ता है।
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1. जिस स्थान पर पटाखा फैक्ट्री हो वहां पर फायर टेंडर पहुंचने का रास्ता होना चाहिए।
2. पटाखा फैक्ट्री के भवन से दूसरे भवन के बीच में कम से कम छह मीटर की दूरी होनी चाहिए।
3. जहां पर पटाखा बनाया जाए वह भवन ईंट, पत्थर और कंक्रीट से बना होना चाहिए।
4. पटाखा फैक्ट्री रेलवे लाइन, बिजली के तार और चिमनी से दूर होनी चाहिए।
5. जहां पटाखा बनाया जाए, वहां घनी आबादी कतई न हो।
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