बृजेशाचार्य महाराज, प्रवाचक।
- फोटो : बृजेशाचार्य महाराज, प्रवाचक।
सुल्तानपुर। धनपतगंंज के सराय गोकुल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा प्रवाचक बृजेशाचार्य महाराज ने बताया कि ब्रह्मानंद को चाहने वाला मोक्ष का अधिकारी बनता है। वहीं, विषयानंद को चाहने वाला जन्म-मरण के बंधन में फंस जाता है। यह ज्ञान शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को दिया था। बताया कि जिन्हें ब्रह्मानंद की ललक होती है, वे माया से मोहित नहीं होते हैं। वे ब्रह्म को सब कुछ मानकर उसकी आराधना और निरंतर ध्यान करते हैं। यही ब्रह्म परम तत्व है। ब्रह्मानंद अवस्था की प्राप्ति के बाद व्यक्ति को सांसारिक दुनिया एक खेल की तरह प्रतीत होती है। कथा समापन पर भागवत भगवान की आरती उतारी गई। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान लालजी उपाध्याय, उदय प्रकाश, दीनदयाल, विष्णु पंडित सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।