सुल्तानपुर। पितृपक्ष की मातृ नवमी पर रविवार को दिवंगत माताओं के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की गई। शहर के सीताकुंड घाट पर लोगों ने गोमती में स्नान कर पूर्वजों का तर्पण किया। घरों में श्राद्ध कर्म के साथ सात्विक भोजन तैयार कर दिवंगत माताओं को अर्पित किया गया। ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद वस्त्र और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देने की परंपरा निभाई गई।
कथा प्रवाचक बृजेशाचार्य महाराज ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मातृ नवमी पर माता, दादी या नानी के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। इस दिन दिवंगत माता की पसंद के सात्विक व्यंजन बनाकर श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जाते हैं। सुहागिन महिलाओं को सुहाग सामग्री भेंट कर उनका आशीर्वाद लेने की परंपरा है। श्रद्धालुओं ने माताओं के दिए संस्कार और जीवन मूल्यों को याद कर उनके प्रति कृतज्ञता जताई। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए कर्म से पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।