सुल्तानपुर। जिले में मूंज से बनाए गए कुर्सी, मेज, सूप, बेना (पंखा) फूटमैट, मचिया, कैरीबैग जैसे कई उत्पाद अब देश के कोने-कोने में पहुंचेंगे। इससे जुड़े व्यापारी अब रेलवे स्टेशन पर अपना स्टॉल लगा सकेंगे। रेलवे की ओर से एक स्टेशन, एक उत्पाद की योजना के स्टॉल के लिए टेंडर निकाला गया है। इसके साथ ही स्टॉल का इंफ्रास्ट्रक्चर भी दुरुस्त किया जा रहा है। जल्द ही रेलवे स्टेशन पर मूंज के उत्पाद का स्टॉल लगेगा।
एक स्टेशन, एक उत्पाद योजना के तहत मूंज उत्पाद के स्टॉल के लिए सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन का पहले ही चयन किया जा चुका है। इससे जिले के मूंज उत्पाद को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दूर-दराज की ट्रेनों के यात्रियों की आवाजाही से इसकी देश व्यापी पहचान बनेगी। रेलवे ने गत दिनों सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर एक स्टेशन, एक उत्पाद योजना का टेंडर निकाला था। यहां पर स्टॉल संचालित करने के लिए लोगों की ओर से आवेदन भी किए जा रहे हैं। आवेदन के साथ ही स्टॉल भी तैयार होने लगा है।
रेलवे स्टेशन के जनरल टिकट काउंटर के सामने स्टॉल के निर्माण का कार्य शुरू करवा दिया गया है। जल्द ही यह कार्य पूरा होने की उम्मीद है। आवंटन प्रक्रिया पूूरी होने के बाद स्टॉल का संचालन शुरू होगा। मुख्य वाणिज्य निरीक्षक ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव के मुताबिक एक स्टेशन, एक उत्पाद के तहत स्टॉल का निर्माण करवाया जा रहा है। टेंडर निकाले जाने के बाद आवेदन भी मिलने लगे हैं। आवेदनों की जांच पूरी होने के बाद स्टॉल का आवंटन किया जाएगा।
स्टॉल पर रहेंगे ये उत्पाद
गोमती नदी के तराई क्षेत्रों में एक से डेढ़ लाख लोग मूंज के बने विभिन्न प्रकार के गृहोपयोगी व सजावटी सामानों का निर्माण कर रहे हैं। इससे बाध, रस्सी, मुड्डा, कुर्सी, मेज, पेन स्टैंड, सूप, बेना (पंखा) फूटमैट, मचिया, कैरीबैग, मौनी, सिकौला, डेलरी, कंगन समेत अन्य वस्तुएं जनपद में प्रमुखता से बनाई जाती हैं। इसके अलावा झूले, पावदान, स्मॉल डिनर टेबल समेत घरों के सजावट के सामान मूंज से बनाए जाते हैं।