लापरवाही का खामियाजा भुगतते यात्री
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रेल ट्रैक की सुरक्षा को लेकर विभागीय अधिकारी संजीदा नहीं हैं। ट्रैक की नियमित व उचित देखरेख नहीं हो पाने से रोजाना लाखों जिंदगियां खतरे के मुहाने से गुजर रही हैं। उचित देखरेख के अभाव के पीछे बड़ी संख्या में लाइनमैनों की कमी सामने आई है। जिले से गुजरे 196 किलोमीटर ट्रैक पर अभी भी 217 लाइनमैनों की कमी है। लाइनमैनों की कमी से पटरियों की उचित देखरेख नहीं हो पा रही है।
पटना-इंदौर एक्सप्रेस में हुए रेल हादसे के बाद शुरू हुई पड़ताल में हकीकत सामने आई है। लाइनमैनों की कमी से रेलवे ट्रैक की नियमित देखरेख व मेंटेनेंस नहीं हो पा रहा है। पटरियों की उचित देखरेख के अभाव में रोज लाखों जिंदगियां खतरे के मुहाने से गुजर रही हैं। जिले से इलाहाबाद-फैजाबाद व लखनऊ-वाराणसी दोहरा ट्रैक गुजरता है। लखनऊ-वाराणसी ट्रैक पर राजधानी समेत कई बड़ी एवं सुपरफास्ट ट्रेनों का संचालन रोज हो रहा है।
प्रति किलोमीटर दो लाइनमैन का प्रावधान
जिले से लखनऊ-वाराणसी व इलाहाबाद-फैजाबाद रेल पथ पर ट्रेनों व मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। इलाहाबाद-फैजाबाद रेल पथ पर पीपरपुर स्टेशन तक ट्रेनों का संचालन सुल्तानपुर मंडल के अंतर्गत होता है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो प्रति किलोमीटर के हिसाब से दो लाइनमैन की जरूरत ट्रैक निरीक्षण के लिए है। प्रत्येक लाइनमैन पटरियों के जोड़ समेत अन्य जरूरी सामानों की निगरानी करता है। मवेशी या किसी प्रकार की वस्तु को भी ट्रैक से हटाने का काम इन्हीं के जिम्मे होता है। पटरियों के मुड़ने, टूटने, जलभराव आदि की सूचना देने का कार्य भी लाइनमैन करते हैं।