कमजोर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के हक का पौष्टिक आहार अधिकारी-कर्मचारी खा रहे हैं। अधिकांश केंद्रों पर भोजन बनाने के लिए चूल्हे नहीं जल रहे हैं। इसकी वजह से केंद्रों पर जाने से पंजीकृत बच्चे व गर्भवती महिलाएं कतरा रही हैं। सोमवार को कुछ केंद्रों पर हौसला पोषण अभियान को लेकर पड़ताल पर इसकी हकीकत फिर सामने आई है। पंजीकृत महिलाएं सारा दोष अधिकारियों-कर्मचारियों को देती हैं।
कुछ मिलत नाय तो काहे अकाज करी
भइया सेंटर पर कुछ मिलत नाय तो काहे अकाज कइ के आई। पहिले दुइ-चार दिन भोजन मिला रहा। केला दूध उहव नाय। यह कहना है कि कुड़वार विकास खंड के हरखपुर सेंटर प्रथम पर पंजीकृत महिला निशां का। सोमवार को सेंटर पर महिला तो कोई नहीं मिली सिर्फ 10 बच्चे मिले। इस सेंटर पर 80 बच्चे व 10 महिलाएं नामांकित हैं। हरखपुर सेंटर द्वितीय पर 75 बच्चे व 10 महिलाएं पंजीकृत हैं लेकिन मौके पर कोई नहीं मिला। पता चला कि सेंटर कभी-कभी खुलता है और भोजन नहीं मिलता है।
हमका-सबका के पूछत बा
अक्तूबर से भोजन व दूध नाय मिला बा। सब साहब लोगय खाय लेत अहां। हमका-सबका के पूछत बा। यह हाल है कुड़वार के देवलपुर आंगनबाड़ी केंद्र का। सोमवार को सेंटर पर 51 पंजीकृत बच्चों में सिर्फ छह मौजूद मिले। गर्भवती महिलाएं एक भी नहीं मिलीं। गांव में मिलने पर यह बातें शकुंतला व छोटका ने बताई। कहा का करै अकाज करी। यहां की कार्यकर्ता ऊर्मिला देवी ने बताया कि जितने बच्चे सेंटर पर रहते हैं उनका भोजन घर से लाती हूं।