रात-दिन यात्रियों को लेकर सड़क पर दौड़ रहीं परिवहन निगम की बसों में आग से बचाव के मुकम्मल इंतजाम नहीं है। रोडवेज की बसों में जो अग्निशमन यंत्र लगे भी हैं, उनकी सक्रियता की नियमित जांच नहीं होती है। परिवहन निगम की अनुबंधित बसों में अग्निशमन यंत्रों की खानापूरी भी नहीं की गई है। बरेली हादसे में 20 यात्रियों की मौत के बाद परिवहन निगम के अधिकारियों की नींद टूटी है। सोमवार को परिवहन निगम के अधिकारियों ने रोडवेज की बसों में लगे फायर यंत्रों को चेक किया।
जिले के रोडवेज डिपो से परिवहन निगम की 80 बसें संचालित हो रही हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए 36 बसें अनुबंधित की गई हैं। परिवहन निगम की बसों में आग से बचाव के मुकम्मल इंतजाम नहीं हैं। जिन बसों में अग्निशमन यंत्र लगे भी हैं, उनकी नियमित जांच नहीं होती। कुछ बसों में लगे अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुके हैं। ऐसे में उनकी वैधता और सक्रियता पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
वहीं, परिवहन निगम से अनुबंधित बसों में अग्निशमन यंत्रों को लगाने की खानापूरी भी नहीं की गई है। सोमवार को अमर उजाला ने परिवहन निगम की बसों का जायजा लिया तो आग से बचाव के इंतजाम नाकाफी दिखे। सुल्तानपुर से फैजाबाद को जाने वाली अनुबंधित बस संख्या-यूपी-44 एटी0226 और सुल्तानपुर से कादीपुर को जाने वाली अनुबंधित बस संख्या-यूपी-42एटी 6242 में फायर यंत्र नहीं लगा था। इलाहाबाद से फैजाबाद को जाने वाली रोडवेज की बस संख्या-यूपी 42एटी 8452 में लगा फायर यंत्र एक्सपायर मिला। इन बसों पर रोजाना सैकड़ों यात्री जान जोखिम में लेकर सफर करते हैं।