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महकमा बेफिक्र, बढ़ते जा रहे एड्स संक्रमित

Mon, 30 Nov 2015 10:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
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एचआईवी पॉजिटिव की संख्या में साल-दर-साल इजाफा होने के बावजूद जिले का स्वास्थ्य महकमा एड्स जैसी जानलेवा संक्रमण को लेकर गंभीर नहीं है। पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद लोग एड्स जैसी जानलेवा संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।
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भारत सरकार एड्स से निपटने के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम चलाती है। जनजागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। बावजूद इसके जिले का स्वास्थ्य महकमा संक्रमण को लेकर गंभीर नहीं। एचआईवी पॉजिटिव की संख्या बढ़ने में संक्रमित ब्लड की अहम भूमिका होती है। पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद एड्स पीड़ित लोगों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

जिला अस्पताल के एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र पर एक एलटी, एक पैथालॉजिस्ट और एक काउंसलर की तैनाती है। जागरूकता का आलम यह है कि सिर्फ विश्व एड्स दिवस के अवसर पर ही जागरूकता रैली निकालकर कागजी कोरम पूरा कर लिया जाता है।  
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क्या है एड्स

जिला अस्पताल की सुरक्षा क्लीनिक काउंसलर मीना सेठ बताती हैं कि मानव शरीर में कुदरती तौर पर रोग प्रतिरक्षा तंत्र होता है। जो शरीर के अंदर किसी तरह के संक्रमण का मुकाबला करता है। प्रतिरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण अंग है सीडी-4 सेल। एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इसकी संख्या 500 से 1800 सीडी-4/परक्यूबिक मिली होती है। एचआईवी वाइरस शरीर में दखिल होकर सीडी-4 कोशिकाओं पर हमला कर इनमें अपनी संख्या बढ़ाता है।

 इन कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देता है। कई वर्षों के दौरान धीरे-धीरे सीडी-4 कम होने लगते हैं। इस कारण शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। नतीजतन शरीर संक्रमण और बीमारियों का मुकाबला नहीं कर पाता। इस अवस्था को ही एड्स कहते हैं।
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