प्राइमरी स्कूलों को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती यह बताने के लिए काफी है कि यहां अव्यवस्थाएं किस कदर हावी हैं। करोड़ों रुपये सालाना फूंकने के बावजूद जिले के परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सहूलियतों का टोटा है। हालत यह है कि जिले के 1299 विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है, वहीं 1568 बिजली की रोशनी से महरूम हैं। विभाग ने शासन से विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के लिए कई बार बजट मांगा, लेकिन अभी तक धन आवंटित नहीं हो सका। अमर उजाला टीम ने गुरुवार को मौके पर जाकर जिले के कुछ स्कूलों की स्थिति देखी तो कुछ ऐसी तस्वीर सामने आई।
जिले के 1730 परिषदीय विद्यालय में 1568 में विद्युत कनेक्शन नहीं हो सका है। कमोबेश यही हाल चहारदीवारी निर्माण का भी है। 821 विद्यालयों में बाउंड्रीवाल बनी है जबकि 909 विद्यालय अभी भी चहारदीवारी विहीन हैं। विद्यालयों में आवारा पशु एवं जंगली जानवर घूमते रहते हैं। बाउंड्रीवाल नहीं होने की वजह से विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा रहता है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों का हाल भी प्राथमिक जैसा ही है। जिले के 612 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मात्र 121 में ही विद्युतीकरण की व्यवस्था है। शेष 481 अभी भी विद्युतीकरण की बाट जोह रहे हैं। 222 विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण कराया गया है, जबकि 390 उच्च प्राथमिक विद्यालय भी चहारदीवारी विहीन हैं।