सुल्तानपुर। कादीपुर के उपकोषागार से सिक्सलेन का 1.15 करोड़ रुपये गबन करने के मामले में जेल में निरुद्ध नायब तहसीलदार को कोर्ट से जमानत नहीं मिल पाई है। मंगलवार को एडीजे प्रथम संतोष कुमार ने आरोपी नायब तहसीलदार की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
बैंक ऑफ बड़ौदा, कादीपुर शाखा से सिक्सलेन मद का एक करोड़ रुपये 14 अक्तूबर 2016 को निकालकर कादीपुर तहसील के उपकोषागार के डबल लॉक में रखा गया था। इसी मद का 15 लाख रुपये पहले से उपकोषागार में जमा था। 15 अक्तूबर 2016 को डबल लॉक का ताला तोड़कर एक करोड़ 15 लाख रुपये चोरी हो गया था। तहसील के नायब नाजिर शिलाजीत दुबे ने अज्ञात में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना में तत्कालीन नायब तहसीलदार रामप्रीत यादव को मामले में आरोपी बनाया गया था।
वह अयोध्या जिले के महराजगंज थाने के अलनाभारी गांव का निवासी है। पुलिस ने आरोपी सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार रामप्रीत यादव को 28 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मंगलवार को आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपराध गंभीर मानते हुए आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
कादीपुर पुलिस ने लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट
उपकोषागार से 1.15 करोड़ रुपये चोरी होने की विवेचना करने वाली कादीपुर पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। डीजीसी क्रिमिनल ने बताया कि शासन के निर्देश पर मामले की विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) वाराणसी को सौंपी गई थी। ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर विजय प्रकाश यादव ने नायब तहसीलदार रामप्रीत यादव को गबन के लिए जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।