सुल्तानपुर। जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ने लगा है। दो दिनों में एलाइजा जांच में नौ डेंगू मरीज मिलने के बाद अब आंकड़ा 52 पार कर चुका है। सितंबर महीने में ही 31 मरीज सामने आने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।
स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज से लेकर सभी सीएचसी और पीएचसी में बुखार के मरीजों की स्क्रीनिंग व रैपिड जांच शुरू कर दी गई है। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. एसी गुप्ता ने बताया कि रोजाना करीब 150 बुखार के मरीज जांच के लिए आ रहे हैं, जिनमें डेंगू जैसे लक्षण मिल रहे हैं। हालांकि, ज्यादातर की रिपोर्ट निगेटिव होती है, लेकिन उन्हें दवा और एहतियात की सलाह दी जा रही है।
सीएमओ डॉ. भारत भूषण ने बताया कि डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। विरसिंहपुर 100 बेड अस्पताल में 10 बेड का वार्ड पहले से ही तैयार है। इसके अलावा सभी 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में पांच-पांच बेड के वार्ड बनाए गए हैं। मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। निर्देश दिया गया है कि अस्पताल में बुखार का इलाज कराने आने वाले हर मरीज का रक्त नमूना लेते हुए एलाइजा जांच किया जाए, साथ ही रैपिड किट की जांच अवश्य हो। जहां डेंगू के मरीज मिल रहे हैं, वहां डॉक्टरों की टीम भेजकर जांच कराई जा रही है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में 30 बेड के कक्ष को डेंगू वार्ड बनाया गया है।
इनसेट..
एलाइजा जांच से ही डेंगू की होती पुष्टि
जिला सहायक मलेरिया अधिकारी डॉ. हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि डेंगू की पुष्टि केवल एलाइजा जांच से होती है। यह सुविधा सभी पीएचसी, सीएचसी और मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपलब्ध है। यहां से लिए गए रक्त नमूने मेडिकल कॉलेज स्थित बीएसएल-2 लैब भेजे जाते हैं। बताया कि निजी लैब में सामान्य जांच होती है, लेकिन एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है।
इनसेट..
पहचानें डेंगू के लक्षण
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. वंशीलाल ने बताया कि डेंगू के लक्षण की पहचान जरूरी है। बताया कि इसमें तेज बुखार व ठंड लगना, सिरदर्द और शरीर पर दाने, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, उल्टी और मितली, रक्तस्राव, कमजोरी व थकान,भूख न लगना जैसा लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
इनसेट
सावधानी बरतें
ढीले-ढाले, फुल आस्तीन के कपड़े पहनें।
मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर व आसपास पानी जमा न होने दें।
टंकी व बर्तनों को ढककर रखें।
घर के अंदर-बाहर सफाई रखें।
बुखार होने पर पानी, नारियल पानी, शिकंजी व तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
चल रहा डेंगू का पीक
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि सितंबर, अक्तूबर और नवंबर डेंगू का पीक समय माना जाता है। बारिश से जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है। इसी वजह से इन महीनों में खास सतर्कता बरतने की जरूरत है।