सुल्तानपुर। टांडा-बांदा हाईवे के टाटियानगर गोमती नदी पुल की मरम्मत में एनएचएआई की तकनीक फेल हो गई है। मरम्मत के पांचवें दिन गोमती नदी पुल का स्लैब फिर टूट गया। छठवीं बार पुल का हिस्सा टूटा है। ऐसे में घटिया मरम्मत कार्य की कलई सबके सामने खुल गई। सूचना पर प्रशासन ने आनन-फानन मार्ग का आवागमन परिवर्तित करा दिया। रूट डायवर्जन से शहर रातभर जाम से जूझता रहा।
टाटियानगर गोमती नदी का पुल साल भर में छठवीं बार टूट चुका है। चौथी बार टूटने पर एनएचएआई ने करीब छह माह पहले पुल की पूरी छत व सरिया का जाल तोड़ते हुए फिर से नई सरिया व छत डलवाई थी। नई छत छठवें महीने में टूट गई थी। करीब पखवारे भर मरम्मत कार्य के बाद एक मार्च को पुल पर आवागमन शुरू हो सका था। बीती बुधवार रात को ज्वाइंटर के पास कराए गए मरम्मत कार्य का आधा हिस्सा फिर पूरी तरह से टूट गया। प्रशासन फिर सकते में आ गया।
प्रशासन ने टांडा-बांदा हाईवे के पुल पर आवागमन बंद कराते हुए रूट डायवर्ट कर दिया। मार्ग परिवर्तन से शहर से होकर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया। वाहनों के आवागमन से रात में शहर जाम से जूझता रहा, लोग परेशान रहे। प्रशासन की सूचना पर एनएचएआई रायबरेली की शाखा ने फर्म को भेजकर बुधवार की देर रात तक पुल के स्लैब के टूटे हिस्से की मरम्मत का कार्य पूरा करा दिया। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पुल पर एक लेन से आवागमन बहाल कर दिया गया है। इसके बाद शहर के लोगों को कुछ राहत मिल सकी।
टांडा-बांदा हाईवे के सहायक परियोजना निदेशक विकल्प सिंह ने बताया कि पुल करीब 30 साल पुराना हो चुका है। इसकी जांच के लिए केंद्र की सीएसआरआई को लिखा गया है। पुल की मरम्मत कराते हुए आवागमन चालू करा दिया गया है।
एनएचएआई के कार्यों की जांच की मांग
बस स्टेशन के दुकानदार परवेज अहमद का कहना है कि टाटियानगर का गोमती नदी पुल बार-बार टूट रहा है। इसमें सरकार का लाखों रुपया खर्च हो रहा है। इसकी जांच नहीं हो रही है। विवेकनगर निवासी प्रदीप शुक्ला ने कहा कि यह मरम्मत की नौटंकी साल भर से चल रही है। रात-दिन शहर में निकलना मुश्किल हो गया है। इसमें किसी अधिकारी को भ्रष्टाचार नहीं दिख रहा है। विनोबापुरी निवासी अमित पांडेय का कहना है कि पिछली बार किए गए रूट डायवर्जंन से शहर में भारी वाहन की चपेट में आने से एक युवक की बाधमंडी चौराहे पर एक युवक की मौत हो गई थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने एनएचएआई के भ्रष्टाचार की जांच कराना मुनासिब नहीं समझा। इसकी जांच होनी चाहिए। विवेकनगर निवासी हरीश ने कहा कि क्या एनएचएआई के पास टूटे हुए हिस्से में पैच लगाने के अलावा कोई तकनीक नहीं रह गई है। इसमें भ्रष्टाचार की बू आती है। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।