शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा आराधना की। मां की पूजा अर्चना के लिए सोमवार भोर से ही क्षेत्र के देवी मंदिरों पर श्रद्धालुओं का तांता लग गया।
शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की। पंडित राजाराम शास्त्री ने बताया कि मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनकी कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं, दिव्य सुगंधों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं। मां के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र होता है इसीलिए इनके इस स्वरूप को चंद्रघंटा कहा गया है।
मां की भक्ति से भक्त कष्टों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है। संग्रामपुर में स्थित प्रसिद्ध कालिकन धाम मंदिर, शहर स्थित देवी पाटन मंदिर, गायत्री मंदिर, काली माता मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों पर भोर चार बजे से ही मां के जयकारे के साथ भक्तों की कतार लग गई। मंदिर का द्वार खुलते ही कतार में लगे भक्तों ने मां के दर्शन-पूजन कर अपने घरों में स्थापित कलश की पूजा की।