सुल्तानपुर। प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है। प्रतिभा की राह में मुफलिसी भी आड़े नहीं आती है। यह बात जिले की हॉकी खिलाड़ी पूजा प्रजापति ने चरितार्थ की है। पूजा ने हाल ही में केरल में हुई सीनियर बालिका नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ की भिलाई टीम को दूसरा स्थान दिलाकर जिले का मान बढ़ाया है। पूजा का सपना अब इंटरनेशनल चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने का है। इसके लिए वे कड़ी मेहनत कर रही हैं।
शहर के आदर्शनगर वार्ड के पल्टू का पुरवा निवासी लल्लू प्रजापति की चार संतानें हैं। लल्लू शहर के गोलाघाट मोहल्ले में करीब 20 साल से ठेले पर चाय बेचते हैं। गरीबी में जीवन यापन करने वाले लल्लू ने अपने बच्चों की परवरिश में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।
यही वजह है कि उनकी बड़ी बेटी पूजा ने हॉकी में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए जिले का मान बढ़ाया है। पूजा ने अपनी प्रैक्टिस की शुरुआत शहर के पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम से शुरू की थी। हॉकी कोच तारिक वसीम के निर्देशन में उन्होंने अभ्यास किया।
कड़ी मेहनत के बदौलत पूजा ने वर्ष 2013 में सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में प्रतिभाग करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वर्ष 2014 में हुई सब जूनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
उपलब्धियों की कड़ी में एक के बाद एक सफलता की कड़ियां जुड़ती गईं। 2017 में पूजा ने सीनियर बालिका नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर जिले का मान बढ़ाया। वर्ष 2018-19 में महाराष्ट्र में हुई खेलो इंडिया खेलो नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में भी उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा।
उनके अथक परिश्रम व लगन के चलते उनका चयन केडी सिंह बाबू स्पोर्ट्स कॉलेज में हो गया। इस वर्ष जनवरी में केरल में हुई सीनियर बालिका नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में पूजा ने छत्तीसगढ़ की भिलाई टीम की ओर से प्रतिभाग किया। नेशनल चैंपियनशिप में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की वजह से छत्तीसगढ़ की भिलाई टीम को दूसरा स्थान मिला।
हॉकी में उनकी प्रतिभा की वजह से कई स्थानों पर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। पूजा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। वे इस समय लखनऊ यूनिवर्सिटी में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि उनका सपना अब इंटरनेशनल हॉकी चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन करना है।
पूजा के पिता लल्लू प्रजापति ने बताया कि बेटी का शुरू से खेल के प्रति रुझान था। हमने कभी भी उसे रोका नहीं। उसे प्रोत्साहित करने की पूरी कोशिश की। जो बन पड़ा मदद की। अपनी मेहनत के दम पर आज वह इस मुकाम पर है। किसी भी पिता के लिए इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है कि लोग उसे उसकी संतान के नाम से जानें।