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Sultanpur News: रूसी तकनीक से बनेंगी 15 सड़कें

Mon, 30 Jan 2023 01:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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सुल्तानपुर। जिले में पहली बार 15 सड़कों को रूस की तकनीक के आधार पर बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कें 10 वर्ष की डिजाइन पर तैयार की जाएंगी। इन्हें बनाने के लिए तीन तरह के रूसी केमिकल का भी इस्तेमाल होगा। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद जिले में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है। सरकार ने निर्माण के लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया है।
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देश में रूसी तकनीक पर कराए जाने वाले सड़क निर्माण को एफडीआर (फुल डेफ्थ रिकाइलमेशन) नाम दिया गया है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईटी) को दी गई है। केंद्र सरकार ने 15 सड़कों के निर्माण के लिए एक अरब 19 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। टेंडर के बाद ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नई मशीन आते ही सड़कों की खोदाई शुरू कर दी जाएगी।

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ऐसे होगा सड़क का निर्माण

आरईडी के इंजीनियरों के मुताबिक चयनित पुरानी सड़क की एक फीट तक गहरी खोदाई कराई जाएगी। खोदाई में निकलने वाली पुरानी गिट्टी व मिट्टी को उपयुक्त मात्रा में पानी, सीमेंट व रूसी केमिकल डालकर उसी स्थान (सड़क) पर मिला दिया जाएगा। इसके बाद कुटाई करके स्वीकृति लंबाई व चौड़ाई में उसे फैलाया जाएगा।
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अवर अभियंता हिमांशु पांडेय के मुताबिक लेप को फैलाने के बाद उसका 28 दिन बाद परीक्षण किया जाएगा। नतीजा अच्छा आने पर पूरी सड़क का निर्माण इसी तकनीक पर आगे बढ़ाया जाएगा। निर्माण के पहले संबंधित सड़क को थोड़ी दूर में खोदाई कराकर उसका सैंपल जॉब मिक्स डिजाइन के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच के बाद ही सड़क 10 वर्ष की डिजाइन पर तैयार की जाएगी। अवर अभियंता के मुताबिक परीक्षण में नतीजा सही आने पर उसके ऊपर तारकोल व गिट्टी डालकर सड़क का लेपन कर दिया जाएगा। लेपन के बाद आवाजाही के लिए सड़क तैयार हो जाएगा।



निर्माण में होगी करीब 25 फीसदी खर्च की बचत

आरईडी के सहायक अभियंता आलोक सिंह के मुताबिक जिले में पहली बार एफडीआर तकनीक से सड़क बनाई जा रही है। इस तकनीक से बनने वाली सड़क 10 वर्ष टिकाऊ होगी। पांच वर्ष में सड़क में कहीं भी खामीं आने पर संबंधित ठेकेदार अपने पैसे से उसकी मरम्मत करेगा।

अगले पांच साल में खराबी आने पर सड़क की मरम्मत संबंधित ठेकेदार स्वीकृत बजट में शामिल राशि से करेगा। इस तकनीक से निर्माण में करीब 25 फीसदी खर्च की बचत होगी। इसमें मजदूर कार्य (लेबर वर्क) कम होगा। निर्माण में नए तरह की मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए ठेकेदारों की ओर से मशीन खरीदी जा रही है।
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