सुल्तानपुर। कोरोना से बचाव को लेकर मोहल्ला क्लास चलाने का शासन का एक आदेश अब गले की फांस बनता जा रहा है। स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरन आनंद ने मोहल्ला क्लास को ग्राम सचिवालय/पंचायत भवन अथवा खेल के मैदान में संचालित कराने का निर्देश दिया था।
शिक्षकों का कहना है कि जब वहां कक्षाएं चल सकती हैं तो विद्यालयों में रोटेशन वार, सीमित संख्या में कक्षाएं क्यों नहीं चल सकती। दूसरा बड़ा सवाल यह है कि मोहल्ला क्लास के लिए पंचायत भवन/ग्राम सचिवालय और खेल मैदान में जाने वाली शिक्षिकाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला के संचालन के लिए शासन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण में विभिन्न माध्यमों जैसे दूरदर्शन, आकाशवाणी, व्हाट्सएप ग्रुप और प्रेरणा साथी के माध्यम से अभिभावकों व बच्चों तक शैक्षणिक सामग्री पहुंचाई गई थी।
अब एक जुलाई से शिक्षक अपने स्कूल में उपस्थित हो रहे हैं। इसको देखते हुए अब पांचवें चरण की योजना लागू की जानी है। महानिदेशक विजय किरन आनंद ने मोहल्ला क्लास संचालित करने का निर्देश दिया है।
इसके तहत सभी शिक्षकों को अपने विद्यालय के सेवित क्षेत्र में जाकर बच्चों को पंचायत भवन/ग्राम सचिवालय अथवा खेल मैदान में इकट्ठा करके शिक्षण कार्य करना है। इस दौरान बच्चों को अलग-अलग व दूर-दूर करके बैठाने का निर्देश दिया गया है।
बीएसए दीवान सिंह यादव ने भी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर आदेश का अनुपालन करने को कहा है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने मोहल्ला क्लास के इस आदेश पर आपत्ति जताई है।
संगठन के जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय ने कहा है कि मोहल्ला क्लास अगर ग्राम सचिवालय/पंचायत भवन और खेल मैदान में चल सकती है तो सबसे सुरक्षित स्कूल भवन में क्यों नहीं चल सकती। रोटेशन के हिसाब से कक्षाएं बुलाई जाएं, ताकि बच्चों की संख्या कम रहे।
बच्चों को कोविड गाइडलाइन की मानकों के अनुसार दूर-दूर बैठाकर पढ़ाया जा सके। शासन के निर्देश के मुताबिक यदि शिक्षिकाएं मोहल्ला क्लास के लिए ग्राम सचिवालय/पंचायत भवन और खेल मैदान में गईं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?